कोटद्वार : दो गुटों में बंटा अवैध खनन का खेल, आखिर जिम्मेदार कौन ?

 कोटद्वार : दो गुटों में बंटा अवैध खनन का खेल, आखिर जिम्मेदार कौन ?
Posted on दिसंबर 18, 2021 8:40 pm
                                                   
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कोटद्वार : कोटद्वार में अवैध खनन एक प्रथा बन चुकी है यू तो सरकार द्वारा खनन का पट्टा आवंटित होने के बाद पट्टा धारक व खनन कर्मियों द्वारा मानकों के विपरीत खनन किये जाने की खबरे आपने अक्सर सुनी होंगी की किस तरह इनके डंपर ओवर हाइट, ओवर लोड होकर सड़कों पर धूल उड़ाते हुए सड़कों को नुकसान पहुचाते हुए चलते है, अन्य वाहनों व पैदल चालकों को भी कई बार घायल कर देते है। नदियों में इनके द्वारा बनाये गए गड्ढो में डूबने से कई मासूमों की जान जान जा चुकी है, कई पुलों की पिलर छतिग्रस्त होने की कगार पर है। खनन की खबर दिखाने पर गोलियां भी चली है और खूनी संघर्ष भी हुआ है पिछले वर्ष तो कुछ नेताओं पर तक मुकदमें दर्ज हुए। लेकिन इतना कुछ होने के बाद खानापूर्ति के लिए केवल चालान या एक दो वाहन सीज कर दिए जाते है। सफेदपोश नेताओं के इशारों पर हो रहे इस काम मे कई नेता, कुछ अधिकारी व चंद खनन व्यापारी सभी सरकार को राजस्व की हानि पहुचा रहे है, सड़कें टूट रही है यानी कि सरकारी संपत्ति को नुकसान हो रहा है और आम जनता तो धूल मिट्टी, रात भर गाड़ियों से शोर से परेशान है। लेकिन एक बड़ी खबर ये है कि पूरे साल बिना पट्टा आवंटित हुए नगर में इतने सालों से भी अवैध खनन चल रहा है.

जो पट्टा धारकों से भी कई गुना राजस्व का नुकसान सरकार को कर रहे है दरअसल कोटद्वार थाना, तहसील, वन विभाग कार्यालय व झंडाचौक पर सुबह तीन बजे से सात बजे तक आपने अक्सर कई लोगों को इकट्ठा होकर बैठा देखा होगा और ये सोचा भी होगा कि ये लोग रोज इतनी जल्दी उठकर थाना, तहसील, वन विभाग कार्यालय व झंडाचौक के सामने खड़े होकर करते क्या है? ये लोग पुलिस, वन विभाग और तहसीलदार के खनन की छापेमारी करने के लिए निकलने वाली टीम की मुखबरी करते है जिससे सुबह सुबह खनन करने वाले ट्रेक्टर ट्रॉली वहां से हटा दिए जाएं। चर्चा ये भी रहती है कि कुछ अधिकारियों के ड्राइवर भी इनसे मिले होते है जो इन्हें पहले ही जानकारी दे देते है। साथ ही आपको बता दें कि रात भर ये लोग विकास नगर गाड़ीघाट, काशीरामपुर तल्ला और बाजार वालों की नींद खराब करते है क्योंकि खनन की चोरी सुबह तीन बजे से शुरू होती है और ऐसे में ट्रैक्टर ट्रॉली की आवाज लोगों को चैन से सोने तक यही देती। और इन ट्रैक्टर ट्राली में न तो नम्बर होते है, न पंजीकरण, न लाइसेंस, न कोई अन्य दस्तावेज। इस तरह के कुछ लोग अपनी जेब भरने के चलते, न जनता को चैन से सोने देते है और खनन के वाहनों से दुर्घटनाये होने के लिए भी ये ही जिम्मेदार है।

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