महाकुम्भ में यह क्षेत्र हुए शामिल, 01 अप्रैल से 30 अप्रैल तक होगा कुम्भ आयोजित, अधिसूचना जारी

 महाकुम्भ में यह क्षेत्र हुए शामिल, 01 अप्रैल से 30 अप्रैल तक होगा कुम्भ आयोजित, अधिसूचना जारी
25 मार्च, 2021
                                                         

हरिद्वार : हरिद्वार कुम्भ की अधिसूचना जारी हो गई है। हालांकि कुम्भ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं से पहले ही शुरू हो चुका है। लेकिन, सरकारी अधिसूचना के अनुसार कुम्भ मेले का आयोजन एक से 30 अप्रैल तक होगा। कुम्भ मेले का क्षेत्र भी निर्धारित कर दिया गया है। प्रभारी सचिव (शहरी विकास) विनोद कुमार सुमन ने अधिसूचना जारी की। अधिसूचना जारी होने के साथ ही शासन-प्रशासन पर कुम्भ मेले में कोविड 19 महामारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अक्षरश: लागू करने का दबाव बन गया है।

कुम्भ मेला में यह क्षेत्र हुए शामिल

हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग से सिद्ध सोत सेतु से चंडी देवी मंदिर हरिद्वार-चीला मार्ग, चीला से कैनाल के दोनों पटरी, वीरभद्र बैराज, दुगड्डा मार्ग के साथ उस स्थान तक जहां लक्ष्मण झूला के लिए सड़क शुरू होती है। स्वर्गाश्रम क्षेत्र के बाहरी सीमा के साथ नीलकंठ महादेव मंदिर पैदल मार्ग के दाहिने किनारे 250 मीटर की दूरी तक समानांतर चलते हुए नीलकंठ मंदिर तक, नीलकंठ मंदिर क्षेत्र के साथ गरुड़चट्टी-दुगड्डा मार्ग पर पीपलकोटी तिराहे तक। वहां से वापस नीलकंठ-स्वर्गाश्रम पैदल मार्ग के दूसरे किनारे के साथ-साथ 250 मीटर की दूरी तक समानांतर चलते हुए लक्ष्मण झूला क्षेत्र के साथ नीरगढ़ के सामने गंगा नदी के बांए किनारे तक।

नरेंद्रनगर-मुनि की रेती मार्ग से नरेंद्रनगर-ऋषिकेश बाइपास के साथ उस स्थान तक जहां ऋषिकेश-देहरादून मार्ग मिलता है। ऋषिकेश-देहरादून मार्ग के साथ वन चौकी, हरिद्वार बाइपास मार्ग के साथ-साथ उस स्थान तक जहां हरिद्वार-ऋषिकेश लोनिवि के मार्ग पर मिलती है, वहां से इस मार्ग के साथ-साथ उस स्थान तक जहां लोनिवि का मार्ग हरिद्वार के हिल बाइपास मार्ग से मिलता है। यहां से हिल बाइपास के साथ-साथ मंसा देवी मंदिर तथा बिल्केश्वर मंदिर तक, फिर टिबड़ी से मोहंड रोड जंगल चौकी तथा वहां बीएचईएल के आवासीय भवनों को शामिल करते हुए मुख्य मार्ग तक। फिर मध्य मार्ग के बाहरी किनारे आवास विकास कालोनी की तरफ से किनारे को लेते हुए उस स्थान तक जहां यह रुड़की-बहादराबाद लोनिवि के मार्ग से मिलता है। वहां से हरिद्वार-दिल्ली मार्ग के रुड़की की ओर 13 किमी तक है। पश्चिम में 250 मीटर की दूरी तक सामानांतर।

नीरगढ़ से तपोवन, बिट्ठल आश्रम मार्ग से नरेंद्रनगर मुनिकी रेती मार्ग तक। संपूर्ण उत्तरी सीमा, भौगोलिक रेखा के उत्तर में 250 मीटर की दूरी तक, हरिद्वार-दिल्ली मार्ग से रुड़की ओर जहां 13 किमी का साइनेज लगा है। यहां से बहादराबाद गांव को शामिल करते हुए बहादराबाद-हरिद्वार बाइपास मार्ग के साथ सीतापुर गांव की सीमा सहित हरिद्वार-ऋषिकेश बाइपास पर रेलवे पुल तक और वहां से गांव जियापोता की बाहरी सीमा के साथ-साथ गंगा नदी को पार करते हुए हरिद्वार से नजीबाबाद मार्ग के सिद्ध सोत सेतु तक। संपूर्ण दक्षिण सीमा ऊपर वर्णित भौगोलिक रेखा के दक्षिण में 250 मीटर की दूरी तक समानांतर को कुम्भ क्षेत्र घोषित किया गया है।

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