सुरक्षा दीवार टूटने से आबादी में आ रहे जंगली जीव, बढ़ा मानव वन्यजीव संघर्ष होने का खतरा

 सुरक्षा दीवार टूटने से आबादी में आ रहे जंगली जीव, बढ़ा मानव वन्यजीव संघर्ष होने का खतरा
26 जून, 2021
                                                         
कालागढ़ । वन विभाग को सौंपे गए अभियंता प्रशिक्षण अकादमी के हॉस्टल (छात्रावासो) के ध्वस्तीकरण के पश्चात अब उसके नीलाम हुए मलबे को उठाने के बाद हॉस्टल की जगह एक वीरान मैदान बन गया है । जिसके कारण वन्यजीव अब आबादी में रुख कर रहे है और यहाँ निवास कर रहे लोगो की जान को खतरा पैदा हो गया है ।
वर्ष 2018 में प्रशासन द्वारा कई आवासों व भवनों को ध्वस्त कर कालागढ़ की कई हेक्टयर भूमि वन विभाग को सौंप दी गयी थी । जिसमे रुड़की स्थान्तरित हुई अभियंता प्रशिक्षण अकादमी के हॉस्टल भी वन विभाग को सौंप दिए गये ।जिन्हें विभाग द्वारा ध्वस्त कर दिया गया । अब लगभग 2 वर्षो बाद वन विभाग ने ध्वस्त किये उन हॉस्टलों के मलबे की नीलामी कर दी है । नीलामी के बाद हॉस्टल के सारे मलबे के साथ लगी हुई सुरक्षा दीवार को भी तोड़कर साफ करा दिया गया है जिससे जंगली जानवर के आने का खतरा कम रहता था उसे भी तोड़ कर उसका मलबा साफ  करा दिया गया है जहाँ हॉस्टल की जगह एक सपाट मैदान बन गया है और जंगली जानवरों के लिए आबादी भरे इलाके में आने का रास्ता साफ हो गया है जिससे मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गयी है । कालागढ़ निर्माण के समय एक बड़े क्षेत्र में बनाये हुए ये नायाब हॉस्टल जिसके होने से जंगली जीव आबादी में प्रवेश नही करते थे वही अब ध्वस्तीकरण के बाद साफ हुए मलबे में रोज दिन में ही जंगली हाथियों का झुन्ड खड़ा हो जाता है जिसे देखने लोगो की भीड़ इकट्ठा हो जाती है जिससे मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ गयी है । कभी दिन में ही हाथियों का झुंड सड़को पर आ जाता है तो शाम ढलते ही बाघ व गुलदार आबादी में आ रहे है जो मवेशियों को तो अपना निवाला बना ही रहे है साथ मे यह इंसानों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते है व किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते है ।

“स्ट्रीट लाइट का ना होना भी दे सकता है बड़ी दुर्घटना को अंजाम”

कालागढ़ एक ऐसी जगह है जिसका कुछ चर्चित एनजीओ शोषण करते आये है व राजनीतिक दलों का भी इस पर ध्यान नही रहा है जिस कारण यहाँ के लोगो की मूलभूत सुविधाएं भी छीनी जा रही है । इन्ही सुविधाओं में से एक है बिजली । जहाँ देश के गांव गांव में बिजली पहुंच रही है वहीं दो वर्ष पूर्व कालागढ़ बिजली विभाग ने यहां की स्ट्रीट लाइट भी काट दी है जिससे जानवरो की आवाजाही और भी ज्यादा बढ़ रही है ऐसे में शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है और लोग अपने घरों में कैद हो जाने को मजबूर हो जाते है । कालागढ़ एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सिचाई विभाग , वन विभाग, बिजली विभाग, जल विद्युत विभाग के बड़े बड़े अधिकारी निवास करते है उस क्षेत्र के खम्बो पर स्ट्रीट लाईट का होना कालागढ़ के लिए बहुत बड़ा दुर्भाग्य है । स्ट्रीट लाईट ना होने के कारण शाम को ही गुलदार और बाघ जैसे खतरनाक जीव आबादी क्षेत्र में  बिना डर के विचरण करते है इनके डर से स्थानीय लोग शाम को घरों से कम निकलते है ।
वहीं यहाँ के स्थानीय प्रतिनिधि जो खुद यही के निवासी है और यहाँ की हर समस्या को बखूबी जानते है फिर भी उन्हें बुनियादी समस्याओं के बारे में बताना पड़ता है और इन सबके बाद जब वह प्रयास करते है तो शासन द्वारा उन्हें एक झूठा आश्वासन देकर दरकिनार कर दिया जाता है या कहे तो लॉलीपॉप दे दिया जाता है । इस पर रामगंगा बांध परियोजना के ईई ने बताया कि  हाथी उनके आवास के निकट भी आ गया था जिसे बमुश्किल जंगल की तरफ खदेड़ा गया ।
वहीं थानाध्यक्ष उमेश कुमार का कहना है कि हाथी दिन में ही थाने के सामने आ जाते है जहाँ लोगो की भीड़ एकत्र हो जाती है और लोग फ़ोटो वीडियो बनाना शुरू कर देते है । ऐसे में कोई दुर्घटना होने का भय बना रहता है । इसकी सूचना हमारे द्वारा वनविभाग को भी दे दी गई है ।

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