आशा कार्यकत्रियों ने राज्य सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप

 आशा कार्यकत्रियों ने राज्य सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप
23 जुलाई, 2021
                                                         
कोटद्वार । उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन ने शुक्रवार को तहसील परिसर में एकत्र होकर प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। जिसमें आशा कार्यकत्रियों ने 12 सूत्रीय मांग पत्र उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। इस दौरान आशा कार्यकत्रियों की अध्यक्ष मीरा देवी ने कहा कि आशाओं को मातृ – शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए नियुक्त किया गया था लेकिन उसके बाद से ही आशाओं पर विभिन्न सर्वे और काम का बोझ लगातार बढ़ाया गया है । दिक्कत की बात यह है कि काम तो आशाओं से लिया जाता है किंतु उनकी मेहनत का भुगतान नहीं किया जाता । यानी आशाओं को सरकार ने मुफ्त का कार्यकर्ता समझ लिया है । यदि हम कहते हैं कि काम बढ़ाना है तो उसका भुगतान भी उसी हिसाब से दिया जाना चाहिए । अलग अलग कामों के छुटपुट पैसों के बजाय आशाओं को मासिक वेतन मानदेय फिक्स किया जाय और रिटायर होने पर पेंशन की व्यवस्था की जाय ।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने दस हजार कोविड भत्ते की घोषणा 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर की थी लेकिन कोई पैसा अभी तक आशाओं के खाते में नहीं आया है , यह वादाखिलाफी नहीं तो और क्या है । ऐसे में आशा सिर्फ जिस काम के लिये रखी गयी है वही काम करेंगी कोविड़ की ड्यूटी क्यों करेंगी। आशा कार्यकत्रियों द्वारा मांग की गई कि आशा वर्करों को सरकारी सेवक का दर्जा और न्यूनतम 21 हजार वेतन लागू किया जाय, जब तक मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तब तक आशाओं को भी अन्य स्कीम वर्कर्स की तरह मासिक मानदेय फिक्स किया जाय, आशाओं को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान किया जाय, कोविड कार्य में लगी सभी आशा वर्करों को 10 हजार रू ० मासिक कोरोना – भत्ता भुगतान किया जाय, कोविड कार्य में लगी आशाओं वर्करों की 50 लाख का जीवन बीमा और 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा लागू किया जाय, कोरोना ड्यूटी के क्रम में मृत आशा वर्करों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और 4 लाख का अनुग्रह अनुदान भुगतान किया जाय, उड़ीसा की तरह ऐसे मृत कर्मियों के आश्रित को विशेष मासिक भुगतान किया जाय, सेवा ( ड्यूटी ) के समय दुर्घटना , हार्ट अटैक या बीमारी होने की स्थिति में आशाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियम बनाया जाय और न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान किया जाय, देय मासिक राशि और सभी मदों का बकाया सहित समय से भुगतान किया जाय ।

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