द मिसिंग आवर : क्‍या डिटेक्टिव बूमराह जिंदगी और मौत के बीच अटके सत्‍य का पता लगा पाएंगे?

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दिल्ली : जिंदगी और मौत के बीच छिपी सच्‍चाई का पता लगाने के चक्‍कर में हम कई बार इतने उलझ जाते हैं कि सच से कोसों दूर हो जाते हैं। कहानीकार सुधांशु राय की ताज़ातरीन मिस्‍ट्री थ्रिलर शॉर्ट स्‍टोरी ‘द मिसिंग आवर’ ऐसी ही एक कहानी है जो जिंदगी की घटनाओं के बीच दबे-छिपे सच का पता लगाती है। इस कहानी की प्रमुख किरदार सुरभि एक सम्पन्न परिवार की महिला है जिसका यह कहना है कि पिछले करीब एक महीने से उसके साथ कुछ अजीबोगरीब घटनाएं घट रही हैं।

हर सुबह जब सुरभि सोकर उठती है तो उसके बंगले के सभी दरवाजे चौपट खुले मिलते हैं, उसके बिस्‍तर के नीचे एक मृत जानवर होता है और उसके तकिए के नीचे कागज़ की एक पर्ची पर खुद उसकी हैंडराइटिंग में कुछ ऐसा लिखा होता है जिसे पढ़ा नहीं जा सकता। यहां तक कि उसका यह भी कहना है कि वह हर रात करीब 2 बजे उठती है, लेकिन उसके बाद उसके साथ क्‍या होता है, यह उसे याद नहीं रहता। और भी हैरानी की बात तो यह है कि बीते कुछ दिनों में उसके घर के सामने कई लोगों की जलकर मौत हो चुकी है।

डिटेक्टिव बूमराह सच्‍चाई का पता लगाने के लिए अपनी पड़ताल एक मुर्दाघर से शुरू करते हैं| उन्‍हें तलाश है उस लाश की जिसकी उंगली में नीलम की अंगूठी है। लेकिन जब उन्हे वो लाश मिलती है, तो उन्‍हें पता चलता है कि जली हुई उंगली पर अंगूठी का निशान तो है, लेकिन अंगूठी गायब है। उनके हाथ कोई सुराग नहीं लगता और तब बूमराह ने अपने सहायक सैम तथा एक अन्‍य सहयोगी डॉ शेखावत के साथ सुरभि के बंगले में रात बिताने का फैसला करते हैं। और तब उन तीनों का सामना जिस मंज़र से होता है वो दिल दहला देने वाला है।

अब सवाल यह उठता है कि मुर्दाघर से अंगूठी कैसे गायब हो गई? आखिर सुरभि के व्‍यवहार में ऐसा क्‍या था जिसने सैम को चौंका दिया था? उस रात क्‍या कुछ हुआ जब डिटेक्टिव बूमराह ने सुरभि के बंगले में रात बितायी।