हिमालय हर्बल चाय व्यवसाय के जन्मदाता सुनील कोठारी से हमारे सवांददाता शैलेन्द्र सिंह की एक भेंट वार्ता

 हिमालय हर्बल चाय व्यवसाय के जन्मदाता सुनील कोठारी से हमारे सवांददाता शैलेन्द्र सिंह की एक भेंट वार्ता
Posted on अक्टूबर 3, 2021 1:23 pm
                                                   

पौड़ी गढ़वाल : देवभूमि उत्तराखंड में कहीं ऐसी प्रतिभाएं हैं जो व्यवसाय को जन्म तो दे ही रही हैं साथ ही साथ अपने पैतृक कार्य को संभाले हुए, लोगों को आजीविका वर्धन का भी कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति सुनील दत्त कोठारी, ब्लॉक द्वारीखाल चेलुसैन पौड़ी गढ़वाल के द्वारा हर्बल चाय उत्पाद का कार्य एक बड़े स्तर व स्थानीय महिला व पुरुषों के स्वयं सहायता समूह से कार्य सन 2016 से कर रहे हैं। फाउंडर तथा सचिव “कोठारी पर्वतीय विकास समिति”के बैनर के तले” हिमालय हर्बल ट्री उत्पादन एवं प्रशिक्षण सहायता केंद्र” चलाते हैं, उनके साथ लाइव एसकेजी न्यूज़ के सवांददाता शैलेन्द्र सिंह से वार्ता के मुख्य बिंदु निम्न प्रकार हैं।

प्रश्न – लाइव एसकेजी न्यूज़ की टीम की तरफ से मैं आपका स्वागत करता हूं।

सुनील कोठारी – जी बहुत-बहुत धन्यवाद आप और लाइव इंडिया की टीम को आपका कार्य उत्तराखंड के सापेक्ष में काफी सराहनीय है।

प्रश्न – आपसे मैं यह जानना चाहता हूं कि उत्तराखंड में व्यवसाय की क्या संभावनाएं हैं?

सुनील कोठारी – व्यवसाय का अर्थ मेरे शब्दों में लगातार कार्य करने से है उस कार्य का विभाजन विभिन्न प्रकार से हो सकता है जो कार्य संबंधित होता है, कच्चे माल की पूर्ति, गुणवत्ता, मांग, उपलब्धता बाजार को समझने की क्षमता साथ ही साथ अपने कार्यकारी टीम का चुनाव आदि, यदि देखा जाए तो ग्रामीण उत्तराखंड के परिवेश में कठिनाइयां शहरों की अपेक्षा अधिक पाई जाती हैं। इसलिए हमारे क्षेत्र में बड़े व्यवसाई यानी कल कारखाने पनपने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रश्न – आपकी हर्बल चाय उत्पादन की शुरुआत कैसे हुई, इसके बारे में हमारी सुधि पाठकों को बताएं।

सुनील कोठारी – मैं अपनी बात आपको विस्तार से समझाने के लिए, मैं आज आप के माध्यम से यह बताना चाहता हूं, कि मैंने 28 साल तक फूड सेक्टर में सप्लाई चैन मैनेजमेंट की नौकरी पर चाहे वह होटल व्यवसाय हो या फिर कंजूमर फूड आइटम साथ ही साथ मेरी पढ़ाई का बैकग्राउंड अकाउंट्स एंड मैनेजमेंट रहा है। यह सभी प्रकार की शैक्षिक योग्यता मेरे अंदर व्यवसाय के गुण को तो जन्म देती हैं तथा विकास करने में सहायक होती हैं, रही उत्तराखंड में हर्बल चाय का उत्पादन व प्रशिक्षण, यह कार्य आसान तो नहीं था परंतु व्यवसाई गुण के कारण पैतृक गुणों को मैंने एक सीमा तक उठाया, तो आज हम लोग 48 तरह की उत्तम हर्बल चाय बना रहे हैं। यह बात नहीं की यह नई खोज है, अपितु उन पर विश्व भर में कोई ना कोई व्यक्ति या संस्था जरूर कार्य कर रही है ।परंतु इस सापेक्ष में मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं, हमारी मिश्रण पद्धति को हमने स्वयं अपने आप विकसित किया है।

प्रश्न – हर्बल चाय के मिश्रण पर विशेष प्रकाश डालने की कृपा करें।

सुनील कोठारी – शैलेन्द्र सिंह जी बात ऐसी है जो चाय हम बनाते हैं वह आयुर्वेदिक आधार लिए हुए हैं, तथा रही बात विशेष मिश्रण की जो उसकी गुणवत्ता को बढ़ाती हैं साथ ही साथ उत्तराखंड की वनस्पति का प्रचार प्रसार का कार्य भी करती हैं। यह सभी वह विरासत का कार्य हमारे पूर्वज तीन चार पीढ़ियों से करते आ रहे थे परंतु मैं यह तो नहीं कहता कि वह चाय बनाने का कार्य करते थे, परंतु जो मिश्रण हम हर्बल चाय में उपयोग कर रहे हैं, वे सभी मिश्रण वे उपचार वे बीमारियों के निदान में करते आ रहे थे, उन सभी आयुर्वेदिक मित्रों को ही मैंने नई प्रस्तुति कर पतियों के साथ हर्बल चाय के साथ स्वाद, खुशबू व बीमारी निजाम की नई प्रस्तुति संसार के आगे रखने की कोशिश की, जो काफी हद तक सफल भी है। 48 तरह की बीमारी निदान के मिश्रण से जन्मी 48 तरह पत्तियों का आधार की हर्बल चाय।

प्रश्न – आपके बारे में सुना है कि आप मात्रा की अधिकता से ज्यादा गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

सुनील कोठारी – शैलेन्द्र सिंह जी, आपने सही सुना, प्राय व्यवसाई अधिक मात्रा में उत्पादन करके ज्यादा लाभ कमाने की सोचते हैं।तथा यह काफी हद तक सही दृष्टिकोण भी है, परंतु मेरी सेवा हर्बल चाय में अधिक मात्रा में उत्पादन मायने नहीं रखता, अपितु गुणवत्ता ही मेरे कार्य का आधार है। गुणवत्ता अगर सही है ,हमारे आधार में तो वह वस्तु आवश्यक लाभकारी होगी। हमारे उपभोक्ता ही हमारा आखरी उद्देश्य पूर्ति होता है। अपितु मुनाफा या लाभ कमाना नहीं। आप के उत्पादन में गुणवत्ता होगी, तो सब कुछ होगा परमात्मा पर विश्वास होना चाहिए, जिसने हमें इस कार्य को करने की प्रेरणा व प्रसार दिया।

प्रश्न – अब आप बताएं की बिच्छू बूटी या नेटल टी का उत्तराखंड प्रवेश में क्या है। तथा इसके लाभ क्या क्या है।

सुनील कोठारी – जी देखिए कुमार जी, मैं आपके मंच द्वारा यह बताना चाहता हूं, कि हम लोग पूरे विश्व में उत्तम तरह की नेटल टी या बिच्छू बूटी से चाय बनाते हैं। यह सिर्फ खाली पौधे की पत्तियां नहीं है, अपितु इनमें हमारे पूर्वजों के द्वारा स्वयं बनाई गई मिश्रण पद्धति का उपयोग भी करते हैं। सामान्य व्यक्ति यह सोचते हैं की पत्तियां सुखाकर पैक कर दी गई है ,परंतु ऐसा नहीं है, पतियों को आधार लेकर मिश्रण से इनकी गुणवत्ता को बढ़ाया जाता है। साथ ही साथ बैलेंस किया जाता है। इस तरह से यह अधिक कारगर तथा स्वास्थ्य वर्धक नेटल टी में कई प्रकार के पोषक तत्व हैं। विटामिन सी, को छोड़कर लगभग सब प्रकार के पोषक तत्व मौजूद हैं। प्राय दो हजार फुट से 12000 फुट ताकि आसानी से पाया जाता है इसके पुष्प फरवरी से जुलाई तक खिलते हैं ,ऊंचाई की अधिकता के अनुसार इन को 3 वर्गों में बांटा जा सकता है। बात नेटल टी की करे तो, यह त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद एवं एंटीबैक्टीरियल गुण रखती है, ब्लड प्रेशर एंटीऑक्सीडेंट ,के कई तरह के पोषक तत्वों का समावेश है । पाचन संबंधी समस्याओं रक्त विकार वह नवीन रक्त निर्माण आदि की समस्याओं में उपयोगी रही है यह सब उपलब्ध जानकारी प्रसार माध्यम पर उपलब्ध है।

प्रश्न – अक्सर यह सुना जाता है कि बिच्छू बूटी या कंडाली की तासीर शरीर में गर्मी पैदा करता है इसमें आपके क्या विचार हैं।

सुनील कोठारी – शैलेन्द्र सिंह जी सामने लोग क्या कहते हैं ? यह कोई प्रभाव नहीं रखता है,पर शोध व परीक्षण यह बात सिद्ध करता है, यह रक्त विकारों को दूर करता है।इस अवस्था में सामान्यतः एक या दो दिन आपको गर्मी महसूस होती है। रक्त सुधार के कारण ऐसा महसूस होता है। इस मंच के माध्यम से हम इस बात का खंडन करते हैं।

प्रश्न – नेटल टी के सेवन विधि पूर्व बताएं।

सुनील कोठारी – मेरे द्वारा उत्पादित हर्बल चाय जो कि आयुर्वेदिक मिश्रण से युक्त है। इसका सेवन आप लगातार तीन माह तक करें तो, यह शरीर में असमय में होने वाली सभी बीमारियों का निदान व रोकथाम। तथा ,आपको हमेशा जवानी का सुख प्रदान करती हैं। साथ ही साथ इसका सेवन सुबह उठने के बाद प्रथम खाद्य पदार्थ के रूप में हमारे द्वारा उत्पादित हर्बल चाय का सेवन करें। धीरे-धीरे आपको कई प्रकार के शारीरिक लाभ नजर आएंगे।

प्रश्न – नेटल या बिच्छू बूटी, कंडाली को लेकर आगे की योजनाएं यानी हर्बल टी के चित्र में अभी तक आप 48 तरह की नवीन प्रस्तुति दे चुके हैं।, खासकर कंडाली के बारे में क्या और संभावना पर आप कार्य कर रहे हैं?

सुनील कोठारी – शैलेन्द्र सिंह जी यह दिल मांगे मोर अभी योजनाएं बहुत हैं। 48 चाय तो सन 2016 से सन 2020 की यात्रा में हमने खोजें, परंतु सन 2021 का सूर्य हमारे लिए ऊर्जा के साथ हमारे आजीविका कार्यक्रम में गति लेकर, ईश्वर आप लोगों के सहयोग से हम नेटल के पौधे से 18 किस्म की नई वस्तुएं समस्त देश को देने जा रहे हैं, बस आप हम से जुड़े रहें, हमें प्रोत्साहन के साथ-साथ हमारे उत्पादित वस्तुओं का सेवन करते रहें। स्वस्थ रहें, सुखी रहें ,यही कामना “कोठारी पर्वतीय विकास समिति” आपको व समस्त मानव जाति के लिए वचनबद्ध है।

शैलेन्द्र सिंह – धन्यवाद सुनील कोठारी जी

सुनील कोठारी – धन्यवाद, आपको वह आपकी टीम लाइव एसकेजी न्यूज़ को समस्त शुभकामनाओं सहित! आशा है, आगे के सफर में आपका साथ यूं ही बना रहेगा।

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