कोटद्वार (गौरव गोदियाल) : जानवरों और पक्षियों से इंसान का प्यार कोई नई बात नहीं है। युगों से इंसान पशु-पक्षियों से प्यार करता रहा है। दुनिया में कई सारे लोग हैं जो पक्षियों और जानवरों से बेहद प्यार करते हैं। कई लोगों ने कुत्ता, बिल्ली जैसे जानवरों को ऐसे अपना लिया है कि वे उन्हें अपने घर-परिवार का बेहद अहम हिस्सा मानते हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो जानवरों को अपने बच्चे मानते हैं और वे उनका पालन-पोषण वैसे ही करते हैं, जैसे कि इंसानी बच्चों का किया जाता है। कई लोग ऐसे भी हैं जो आवारा व बेसहारा पशुओं को अपनाकर उनका पालन पोषण करते हैं । कोटद्वार में भी ऐसे कई पशु-पक्षी प्रेमी हैं जिनके किस्से सुनकर आप भी उनके अनूठे प्रेम के दीवाने हो जाएंगे।

जज्बे को सलाम : बीमार, घायल जानवरों के लिए रश्मि वर्मा (चीना) बनी फरिश्ता

सड़कों पर घूमते आवारा जानवरों के प्रति प्रेम दिखाने वाले लोग बेहद नेकदिल होते हैं। ऐसे ही नेकदिल लोगों की सूची में जनपद पौड़ी के कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्र के वार्ड नम्बर 15, गोविंद नगर में निवास कर रही रश्मि वर्मा ।जो सड़कों पर आवारा घूमते जानवरों की मदद करने में जुटी रहती हैं । रश्मि सड़क पर बीमार और घायल अवस्था में घूमने वाले आवारा जानवरों की भी सहायता कर रही हैं और यह नेक काम वे पिछले कई वर्षों से नियमित करती आ रही हैं।

रश्मि वर्मा का यह नेक दिली काम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आया है और सड़कों पर जीवन बिताने वाले बेजुबान जानवरों के लिए यह कार्य मरहम साबित हो रहा है। वाकई मन में जीव दया रखना बेहद पुण्य का काम है और कोटद्वार के गोविंद नगर की रश्मि इसको बखूबी निभा रही हैं ।

जज्बे को सलाम : बीमार, घायल जानवरों के लिए रश्मि वर्मा (चीना) बनी फरिश्ता

बता दे कि रश्मि वर्मा को सड़क पर अगर कोई भी घायल पशु नजर आ जाता है तो वह उसकी मदद करती हैं और पूरा प्रयास करती हैं कि वह जानवर को पूरी तरह से ठीक कर सके। यहां तक कि वह घायल पशु को अपने घर ले आती हैं और पूरी देखभाल के बाद जब पशु ठीक हो जाता है तो उसको वापस छोड़ दिया जाता है । फिलहाल अभी मात्र 10 दिन पूर्व एक कुत्ते का बच्चा गाड़ी के नीचे आ गया था जिससे उसके पैर में चोट लग गई थी जिस कारण वह चल नहीं पा रहा था । अचानक रश्मि की नजर उस कुत्ते के बच्चे पर गई जिसे वह वहां से उठाकर अपने घर ले आई जिसके बाद उसका उपचार पशु चिकित्सक द्वारा करवाया गया अब कुत्ते की स्थिति चलने लायक हो गई है । ऐसे ही उनको सड़क पर कोई भी बीमार कुत्ता, बिल्ली, चिड़िया इत्यादि घायल अवस्था में मिलते हैं तो वे उनको घर ले आती हैं और उनका ध्यान रखती हैं। यह नेक कार्य अब उनके जीवन का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।

रश्मि वर्मा बताती है कि पशु पक्षी प्रेम के चलते उनके भीतर जीवों को बचाने का जज्बा जाग उठा और उन्होंने अपने घर में ही रेसक्यू सेंटर बना दिया। वे दुर्घटना अथवा अन्य किसी कारण से घायल पशुओं का रेस्क्यू करके उनका इलाज करती हैं और स्वस्थ होते ही उन्हें छोड़ दिया जाता है ।उनका कहना है कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने मन की आवाज सुननी चाहिए और प्रकृति के लिए कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए । प्रत्येक नागरिक को भी सभी जीवों के प्रति करुणा रखनी चाहिए ।