चलें सूरज और केतु की ओर

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  • @कृष्णा नारायण

दिल्ली : 7 फरवरी 2021 को चमोली में हुआ त्रासदी हम सब को मर्माहत कर गया. पिछले वर्ष मैंने एक आलेख लिखा था सूर्य के विचलन पर, जिसे वैज्ञानिक सोलर मैक्सिमा और सोलर मिनिमा के नाम से जानते हैं. इन दोनों को समझने का विज्ञान का अपना तरीका है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसे जानने हेतु शोध करना प्रारम्भ किया तो मैंने यह पाया कि सूर्य और केतु जब एक खास कोणीय सम्बन्ध बनाते हैं और उस सम्बन्ध के निर्माण के समय जब गुरु, मंगल और शनि भी परस्पर एक दूसरे से अंशात्मक सम्बन्ध बना लेते हैं तब सिर्फ भारत ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व में दो तरह की बाते होती हैं.

  1. विश्व में अशांति की स्थिति,युद्ध जैसे हालत का निर्माण
  2. जलवायु परिवर्तन ,प्राकृतिक आपदा में वृद्धि . (हालाँकि सूर्य के विचलन पर मैंने पिछले वर्ष एक आलेख लिखा था और वहां कुछ बातों की चर्चा की थी. बार बार लिखने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है कि, जरूरत है इस क्षेत्र में शोध किये जाने की. ज्योतिष के इस आयाम से लोगों का परिचय करवाने की और इसके माध्यम से लोगों के दृष्टि का कोण बदलने की.)
  • सूर्य और केतु

विगत कुछ वर्षों के अपने शोध में मैंने सूर्य को विचलित होते हुए देखा है .पूरे विश्व का पोषण करने वाला सूर्य भी विचलित हो सकता है? लगातार निर्विकार रूप से हर किसी को अपनी रश्मियों के माध्यम से ऊर्जावान बनानेवाला सूर्य भी विचलित हो सकता है ? कौन है जो ऊर्जा के असीमित भण्डारक को भी विचलित कर देता है ? ये सवाल तो मेरे मन में आये ही साथ ही साथ यह जिज्ञासा भी हुई की क्या होता है जब सूर्य विचलित होता है? पहली जिज्ञासा.. कौन है जो सूर्य को विचलित करता है का जवाब मिला – केतु.

अब यहाँ आगे बढ़ने से पहले यह जानने की इच्छा बलवती हो गयी की केतु में ऐसा क्या है जो सूर्य विचलित हो जाता है?? जरा नजदीक गयी तो पाया की केतु के पास दिल है .अब शरीर में दिल का काम है रक्त के अशुद्धि को दूर करके उन्हें शुद्ध करना और वापस शरीर में भेजना . दिल यह काम अनवरत करता ही रहता है ,इसके लिए शरीर उससे कोई मांग नहीं करता .

दूसरी तरफ सूर्य, धरती का पोषण तो करता है, लेकिन जब तक धरती अपनी प्यास नहीं जाहिर करती वह मेघों के निर्माण में सहायक नहीं होता है. एक तरफ केतु जिससे शरीर कोई मांग नहीं करता, फिर भी रक्त शुद्धि करता रहता है, दूसरी तरफ सूर्य जो बगैर धरती की मांग के मेघों के निर्माण में मदद नहीं करता है . केतु की बिना मांगे मदद करने की आदत से सूर्य परेशान हो जाता है .

सूर्य केतु के परस्पर कोणीय सम्बन्ध और विचलन को हम पृथ्वी वासी तब तक नहीं समझ पाते जब तक इससे शनि, मंगल और गुरु का खास कोणीय जुड़ाव नहीं होता है.

कहने का तात्पर्य यह की बात जब तक सूर्य और केतु तक सीमित रहती है सब कुछ ठीक रहता है लेकिन जैसे ही इसके साथ ऊपर वर्णित ग्रहों का जुड़ाव होता है -पृथ्वी पर उत्पात मचने लगता है .पांच प्राणो का सीधा सम्बन्ध सूर्य से है और जब सूर्य असंतुलित होता है तो स्वाभाविक है कि इनका भी लय बिगड़ेगा और इनका लय बिगड़ने का अर्थ है व्यक्ति के भीतर अशांति का बढ़ना . एक अशांत व्यक्ति कहाँ से शांत समाज का गठन कर सकता है . परिणाम सामाजिक अशांति और हिंसक स्थिति .

  1. जहाँ तक बात युद्ध की है – भारतवर्ष की बात करें तो मैंने पहले भी लिखा है कि सीमा पर दुश्मनो से निपटने के लिए सरकार के पास पर्याप्त सेना है पर देश के भीतर के अराजक तत्वों से लड़ना सरकार के लिए 2021 में एक अहम् चुनौती होगी.मैंने पहले भी लिखा है कि चीन सिर्फ लद्दाख में ही नहीं उत्पात मचा रहा है वरन वह देश के भीतर काफी गहरी पैठ बना चुका है. देश को अस्थिर करने के उसके प्रयासों में इस वर्ष तेजी आएगी. सरकार के प्रति विरोध का स्वर देश के भीतर ही उग्र हों यह विदेशी ताकतों का सामूहिक प्रयास होगा. भारत सरकार कि एक अति महत्वपूर्ण योजना, चार धाम परियोजना को बाधित किया जा सकता है. संचार व्यवस्था बाधित कि जा सकती है. आभासी माध्यम के प्रयोग द्वारा युद्ध किये जाने का तकनीक खूब इस्तेमाल किया जायेगा. चल और छद्म निति द्वारा देश की आधारभूत संरचना को नुकसान पहुँचाने की सामूहिक योजना को अंजाम तक पहुँचाने की कोशिश होगी.

लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि भारत की स्थिति काफी मजबूत है. इस वर्ष भारत अपने आक्रामक तेवर से विश्व को चकित करेगा. आगे आने वाले माह जुलाई,अक्टूबर और नवंबर में किसी बड़े घटना को अंजाम दिया जा सकता है. किसी बड़े युद्ध की सम्भावना तो नहीं है लेकिन आपसी मनमुटाव की स्थिति से इंकार नहीं.

  • भारत के साथ साथ वैश्विक पटल पर हॉट स्पॉट रहेंगे –

चीन ,रूस ,अफ़ग़ानिस्तान ,यमन ,इथियोपिया ,लीबिया , अमेरिका -ईरान -इजराइल और पर्शियन गल्फ ,अमेरिका -उत्तरी कोरिया और यूक्रेन .

2 – जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदा

मैंने इसके बड़े में भी पहले लिखा है और आगे आने वाले कुछ माह की चर्चा की है. आज यहाँ बात मई माह के अंतिन सप्ताह की और अक्टूबर माह के 10 तारीख से 20 तारीख के बीच की करते हैं. यह वह समय है जिसमें ग्रहों द्वारा प्रकृति के असंतुलित होने का संकेत मिल रहा है. ग्रहों के इन संकेतों के साथ अगर सम्बंधित विभाग लयबद्ध होकर कार्य करें और जगह कहाँ, क्या पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश या कहीं और, यह जानने का प्रयास करें तो बचावकारी तो होगा ही पर्यावरण को भी सुरक्षित किया जा सकेगा.

लेखिका : कृष्णा नारायण, शिक्षाविद दिल्ली