Category : सम्पादकीय

सम्पादकीय

सोचने और करने के बीच मर्जिन होने से आ जाते है समस्यारूपी विघ्न

देहरादून : मेहनत तो बहुत करते है, मेहनत करने की इच्छा भी है और मेहनत का संकल्प भी करते है परन्तु रिजल्ट में अन्तर आ जाता है। प्रश्न है कि सुनते भी एक है सुनाते भी एक है विधि भी सबकी एक है, विधान भी एक है तब अन्तर क्यो आ जाता है। यह अन्तर बहुत […]Read More

उत्तरप्रदेशसम्पादकीय

विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी भारत की सांस्कृतिक राजधानी

ज्योर्तिलिंग काशी विश्वनाथ मंदिर का स्वतंत्र भारत में पहली बार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विस्तार एवं जीर्णोद्वार किया जा रहा तथा आम जनमानस के लिए 13 दिसम्बर 2021 को लोकार्पण किया जायेगा। देश के लगभग 241 वर्ष पूर्व हिन्दू शासक महारानी होल्कर द्वारा जीर्णोद्वार किया गया था तथा पंजाब केशरी महाराजा सरदार रणजीत […]Read More

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गांधी के विचार, विनोबा का सानिध्य और जयप्रकाश का साथ पाए अमरनाथ भाई की कहानी

अमरनाथ भाई कहते हैं कि गांधी के विचार, विनोबा का सानिध्य और जयप्रकाश नारायण के साथ रह कर उनका जीवन धन्य हुआ। वर्तमान परिस्थितियों से अमरनाथ भाई खिन्न हैं, वह कहते हैं आज़ादी तक तो भारतीय जनता ने संघर्ष किया पर पहले लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता निश्चिंत हो गई कि अब सब काम […]Read More

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इंटरनेट डिजिटल का जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने से हमारे ब्रेन और सोचने पर होता है असर – मनोज श्रीवास्तव

चिल्ड्रेन पर्सनालिटी ई-कैम्प, डिजिटल वेलनेस देहरादून : आज की दुनिया में हर कार्य डिजिटल तरीके से हो रहा है। डिजिटल कार्य, ऑफिशियल कार्य, डिजिटल गेम, डिजिटल चौट, डिजिटल शॉपिंग, डिजिटल खाना डिजिटल पढ़ाई आदि सभी डिजिटल तरीके से होने लगा है। लॉकडाउन के समय पर भी डिजिटल के द्वारा ही हम एक दूसरे से कनेक्ट […]Read More

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संस्मरण : जब 1990 में श्रीनगर गढ़वाल आये अविभाजित उत्तर प्रदेश‌ के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन से देश‌भर में शोक की लहर,‌श्रद्धांजलियों‌ का दौर‌ जारी नई दिल्ली/लखनऊ/ देहरादून : अविभाजित उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री,‌ राजस्थान‌ के पूर्व राज्यपाल श्री राम जन्म भूमि आंदोलन के पुरोधा कल्याण सिंह जी का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया वह पीजीआई लखनऊ मे भर्ती  थे। उनके निधन […]Read More

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अटल निश्चय बुद्धि बनना अर्थात कभी भी अपने में भी संशय ना होना

देहरादून : अटल निश्चय बुद्धि बनना अर्थात कभी भी अपने में भी संशय ना हो। सफल होंगे या नही इसमें संशय ना हो बल्कि निश्चय बुद्धि हो। स्वयं में अगर कमजोरी का संकल्प उत्पन्न होता है तो कमजोरी के संस्कार बन जायेंगे। जैसे एक बार भी शरीर कमजोर हो जाता है तो कमजोरी के जर्म्स […]Read More

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देवभूमि के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को बचाए रखने लिए उठाने होंगे कुछ जरुरी कदम

@अजेंद्र अजय देहरादून : किसी भी प्रदेश के निर्माण के पीछे उसके इतिहास, सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, भाषा आदि के सरंक्षण की भावना छिपी होती है। अगर ये तत्व गायब हो जाएं तो वो प्रदेश आत्माविहीन माना जाएगा। लिहाजा, प्रदेश के भौतिक विकास के साथ-साथ इन सबके सरंक्षण की भी आवश्यकता है। वर्तमान में सोशल मीडिया […]Read More

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कोरोना काल में महत्वपूर्ण है विश्व रक्तदाता दिवस की अहमियत समझना

कोरोना काल और विश्व रक्तदान दिवस हरिद्वार : कोरोना काल में हमने देखा कि सोशल मीडिया पर प्लाज़्मा दान के लिए लोग एक दूसरे से दानदाता उपलब्ध कराने के लिए मदद की गुहार लगा रहे थे और कुछ लोग निःस्वार्थ भाव से दानदाताओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सम्पर्कसूत्र का काम कर रहे थे। इस […]Read More

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विश्व पर्यावरण दिवस में गोरैयों के संरक्षण से करें परिस्थितिकी तंत्र बहाली

हिमांशु जोशी हरिद्वार : संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 5 जून 1974 को अमरीका की मेज़बानी में पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था, तब से हर साल के 5 जून को यह दिवस मनाया जाता है जिसकी मेज़बानी हर बार एक नए राष्ट्र को दी जाती है और इसका विषय भी नया रहता है। इस […]Read More

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विश्व साईकिल दिवस विशेष : साईकिल में टिफिन टांगे लोगों का भी ध्यान रखिए

हरिद्वार : कल मैं अपने नज़दीकी औद्योगिक क्षेत्र में सड़क किनारे बैठे महंगी-महंगी कारों, ट्रकों को गुज़रते देख रहा था। बीच-बीच में कुछ लोग अपनी साईकिलों में टिफ़िन टांगे चौराहें पर बायां हाथ लम्बा कर इन तेज़ दौड़ते वाहनों के बीच सड़क पार कर रहे थे, मुझे अब सड़कों में बहुत कम दिखने वाले यह […]Read More

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अंतर्राष्ट्रीय महासागर दिवस : प्रदूषण में डूबते महासागरों का दर्द

एजेंद्र कुमार नई दिल्ली : इस अनंत ब्रम्हांड में यदि कोई सबसे खूबसूरत जगह है, तो वह है हमारी पृथ्वी। क्योंकि अब तक ज्ञात जानकारी के अनुसार इस अंतहीन आकाश में यदि कहीं जीवन है, तो वह हमारी इस धरती पर ही है और वैज्ञानिक शोधों से पता चलता है कि इस वसुंधरा पर सर्वप्रथम […]Read More

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हिंदी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस

हरिद्वार / देहरादून : पण्डित युगुल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन आरम्भ किया था । उसी ऐतिहासिक दिन की याद में और हिंदी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। भारतीय हिंदी पत्रकारिता उदन्त मार्तण्ड के […]Read More

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हिम्मत श्रेष्ठ जीवन का है विशिष्ट आधार और हिम्मत का आधार है ईमानदारी

देहरादून : हिम्मत का आधार है -ईमानदारी। ईमानदारी हमारी योग्यता को बढ़ाता है। दूसरों के प्रति ही नही बल्कि स्वयं के प्रति भी ईमानदार बनना अर्थात सच्चे दिल से बनने वाले लक्ष्य पर चलते रहना। यदि दूसरों के अनुसार अपने वाणी को, कर्म को, स्वांस को व संकल्प को संग दोष में व्यर्थ तरफ गंवाते […]Read More

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जन्मदिन की डायरी : पत्रकारिता का एक दस्तावेज़

देहरादून (हिमांशु जोशी): पिछले मई जब क़लम को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानते लिखना शुरू किया था तब यह समझ नही आया था कि यह मेरा भ्रम है या विश्वास। तब से आज एक साल पूरा हो गया और कोरोना काल में बहुत बार ऐसा लगा कि यह मेरा भ्रम ही था पर एक […]Read More

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भगवान गौतम बुद्ध का मध्य मार्ग आचार्य शंकराचार्य के अद्वैतवाद का रुप है, जिसमे आत्मा के स्थान पर मन के

डॉ. मुरलीधर सिंह “तथागत” ऊॅं पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् , पूर्ण मुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय, पूर्ण मेवा वशिष्यते। ऊॅ शांतिः शांतिः शांतिः अयोध्या : आज लगभग 2584 वर्ष पूर्व ग्राम लुम्बिनी में राजकुमार सिद्धार्थ का राजा शुद्दोधन के घर पर जन्म हुआ था। सुयोधन कपिलवस्तु गणराज्य के राजा थे। यह स्थान जनपद सिद्धार्थनगर से आठ किलोमीटर अंदर […]Read More

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मौत और महामारी का न्यायशास्त्र!

दिल्ली : मौसम में तपिश और उमस लगातार बढ़ रही है, लेकिन देश में फैली महामारी के कहर से भी मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकतर लोग सोशल मीडिया पर सांसों को बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। क्योंकि देश में आजकल इंसानियत और मदद विशेषाधिकार सा हो गई […]Read More

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मां और कोरोना

@सीमा रानी बेटी का मासूम सा सवाल -मां आपको नहीं होना चाहिए था कोरोना । आपको कैसे हो सकता है कोरोना । आप हमारे जीवन की नैया हो, हमारे जीवन रूपी नैया की खवया हो, आप हमारे जीवन का सार हो आपको नहीं होना चाहिए था कोरोना। आपके स्पर्श के बिना हम कैसे जिएंगे ? […]Read More

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दोनो ही अभिनय में पारंगत ! मैं और माँ

@अंजू खरबंदा कल कितने दिन बाद मिले मैं और माँ दिल का हाल बाँटा कुछ इघर की कुछ उधर की जब मिल बैठे मैं और माँ ! कुछ बातों में उनका मन भर आया कुछ में आंखे छलछला आई मेरी जब हाल बाँटने बैठे मैं और माँ ! गई थी कि खूब बातें करूंगी जी […]Read More

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दुःखद् : सरदाना का असमय जाना, पत्रकारिता एवं समाज के लिए बड़ी क्षति

वो चमकता चेहरा, वो तीखे बोल। जियो तो ऐसे जियो कि जाने पर ज़माना याद रखे। याद आओगे सरदाना। देहरादून : सरदाना की मौत पत्रकारिता की चकाचौंध के पीछे छिपे असली चेहरे को एकबार फिर से याद दिलाने के लिए काफ़ी है। आजतक के पत्रकार रोहित सरदाना की मृत्यु की खबर आई। यह खबर मेरे […]Read More

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संस्मरण : जब मार्च 2021 मुझे हुआ कोरोना हुआ, कोविड- 19 सावधानी ही है बचाव

ऋषिकेश : मेरा नाम डॉ. हरीश गौड़ है। मैं ऋषिकेश उत्तराखंड में रहता हूं।सभी को मेरा सादर नमस्कार है सभी आरोग्य रहें स्वस्थ रहें। सारी दुनिया खासकर हमारे देश में कोरोना महामारी का दौर चल रहा है। ऐसे में सावधानी अपेक्षित है। मास्क पहने ऐसा मास्क जिससे नाक मुंह ढका हो, शोसियल डिस्टेंस रखें जैसाकि […]Read More

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चेतक वाले दीवान जी का नोटिस तामिल कराने का अंदाज निराला, नोटिस तो देते नही रिसीव के लिए देते है

मंगलौर : आजकल कोतवाली के एक चेतक वाले दीवान जी बड़े चर्चाओं में है वैसे तो कोतवाली ही चर्चाओ में रहती है किन्तु आजकल वह अपने चेतक वाले दीवान जी के चलते बड़े चर्चाओं में है. चेतक वाले दीवान जी एक 107/16 का नोटिस को तामिल कराने गये और कहा गया कि इसको पढो और […]Read More

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पर्यावरण हलचल : जन समुदाय के बिना नही बुझाई जा सकती हिमालय की यह आग

दिल्ली : एमआई 17 हेलीकॉप्टरों की मदद से उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग बुझाई जा रही है। जंगलों में आग मुख्यतः जमीन पर गिरी सूखी घास-पत्तियों से फ़ैलती है। उत्तराखंड के पहाड़ों में चीड़ के पेड़ों की अधिकता यहां के पहाड़ों में आग फैलने का मुख्य कारण है। चीड़ की पत्तियां जिन्हें पिरूल भी […]Read More

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निश्चय की निशानी है नशा और नशे की निशानी है खुशी

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : एक तरफ राजा का अधिकार अर्थात सर्व प्राप्तियों के अधिकारी हैं और दूसरी तरफ ऋषिपन में रहते हुए बेहद के वैराग्य वृत्ति वाले हैं। एक तरफ सर्व प्राप्ति के अधिकार का नशा है तो दूसरी तरफ वैराग्य का आलौकिक नशा है। जितना ही श्रेष्ठ भाग्य होगा, उतना ही श्रेष्ठ त्याग भी […]Read More

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शिक्षक की स्थिति होती है सेवक के समान, अगर फ्री रहेंगे तो और बातें स्वतः आएंगी

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : हमारी भूमिका शिक्षक के समान है, शिक्षक की स्थिति सेवक के समान होती है। अर्थात शिक्षक को बिना सेवा के और कोई बात आकर्षित न करें। दिन रात सेवाओं में लगा रहे, अगर फ्री रहेंगे तो और बातें स्वतः आएंगी। खाली घर में ही बिच्छू, टिंडन आते रहते हैं। बुद्धि या […]Read More

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हिम्मत के आधार पर हम बन जाते है मदद के पात्र

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : मदद के सागर में मदद लेने की विधि है हिम्मत। हिम्मत के आधार पर हम मदद के पात्र बन जाते हैं। हमारी एक कदम हिम्मत की और हजार कदम मदद की होती है। हिम्मत के आधार पर हम असंभव को संभव करके दिखा देते हैं। दृढ़ संकल्प हमारी सफलता की चाबी […]Read More

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ड्रग पीड़ित व्यक्ति से अधिक जरूरी है, परिवार वालों की काउंसिलिंग करना

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : ड्रग एडिक्शन के छुटकारा में पीड़ित व्यक्ति से अधिक उसके दोस्तों और परिवार की भूमिका अधिक होती है। अन्य शब्दों में ड्रग लेने वाले व्यक्ति की काउंसिलिंग करने से अधिक आवश्यकता है पहले उनके घर वालों की काउंसिलिंग किया जाये। नशे की चपेट में केवल वही व्यक्ति नहीं आता है बल्कि […]Read More

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यदि अभिमान है तो नही होगा अपमान सहन

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : क्रोध करने से छुटटी ले लेनी है। थोड़ा-थोड़ा तो क्रोध करना पड़ता है, यह कहना गलत है। क्रोध करने के लिए लोग तरह तरह के बहाने बनाते हैं, पूछा जाएगा की आपने क्रोध क्यों किया, कहते मैंने नहीं किया, लेकिन उन्होंने मुझे क्रोध कराया। मुझसे क्रोध कराया गया, वैसे में क्रोध […]Read More

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इच्छा तो है लेकिन शक्ति न होने के कारण नही पहुच पाते है इच्छा तक

देहरादून : लक्ष्य और लक्षण सम्मान करने वाले सर्व प्रकार के उलझनों से निकल जाते है। लक्ष्य और लक्षण की समीपता सफलता का आधार है। लक्ष्य के अनुरूप लक्षण को प्रैक्टिकल में लाना है। लक्ष्य तो सभी उच्ॅाा रख लेते है लेकिन लक्षण धारण करने में कुछ कमियां रह जाती है। एक है जिन्हे सुन […]Read More

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अभी नही तो कभी नही : हर सेकेंड के हर संकल्प का महत्व जानकर ही करते रहे श्रेष्ठ कर्म

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : अभी नहीं तो कभी नहीं इस श्रेष्ठ स्लोगन के अनुसार कार्य करना है। जो भी श्रेष्ठ कार्य करना है वह अब करना है, तब और कब नहीं बल्कि अब। हर कार्य में हर समय यह याद रखना है अभी नहीं तो कभी नहीं। जिनको यह बात स्मृति में रहती है वह […]Read More

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कम संसाधनों में अनुकूलतम स्थिति प्राप्त करना कहलाता है बैलेंस

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : पावरफुल स्थिति कल्याणकारी स्थिति कहलाती है। साईलेंस की स्टेज द्वारा पावरफुल स्थिति का अनुभव करते हैं। संकल्प द्वारा यह दिखाई देगा कि हर कार्य सिद्ध हुआ पड़ा है। सिद्धी का पाठ अर्थात सिद्धी की विधि ज्यादा से ज्यादा शांत स्वरूप स्थिति में बने रहने में मदद करती है। इसी लिए कहा […]Read More

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अपना घर – एक अलग नजरिया

अंजू खरबंदा दिल्ली : जब से पता चला साथ वाली आंटी ओल्ड एज होम में शिफ्ट हो गयी हैं दिल बड़ा उदास सा था। मै पहाडो की रहने वाली चंचल हिरणी…. शहर की भीड़ भाड़ से कतराती थी । मुम्बई की बड़ी बड़ी इमारतें और माचिस की डिबिया जैसे घर मुझे जेल से कम न […]Read More

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स्वयं और दूसरों के चिन्ता मुक्ति का आधार है शुभचिन्तन

शुभ चिन्तन वाले, सदैव प्रसन्नता की पर्सनालिटी में रहते है देहरादून : शुभचिन्तन स्व और दूसरों के चिन्ता मुक्ति का आधार है। आत्मिक शाक्ति जितना ही कम होगी उतना ही खुशी को बाहर खोजेंगे, उतना ही आत्मिक शक्ति कम भी होगी। व्यक्त के स्वार्थ अर्थात स्व के अर्थ कार्य करना अल्प काल के खुशी का […]Read More

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अपने को हर सेकेण्ड बिजी रखना ही है परिवर्तन का मूल आधार

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : परिवर्तन का मूल आधार है अपने को हर सेकेण्ड बिजी रखना। कर्म के सेवा में बिजी रहने से सफलता का परिवर्तन स्वतः होता है। सदैव अन्दर यह संकल्प बना रहे कि जो भी समय है वह सेवा अर्थ ही देना है। चाहे अपने शरीर के लिए अवश्यक कार्य में समय लगाते […]Read More

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अटेन्शन और चैकिंग है श्रेष्ठ विधि, स्वयं की करो चैकिंग दूसरो की नही

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : अपने कर्म के प्रति श्वांसों श्वांस सेवा हो कर्म की याद और श्वासों श्वांस की सेवा का बैलेंस होने से हमें बैलेसिंग प्राप्त होती है। इससे हम मेहनत और युद्ध करने से छूट जायेंगे। हम क्या, क्यों, कैसे इन प्रश्नो से मुक्त होकर प्रसन्न बने रहेंगे। सफलता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है […]Read More

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समय कम किन्तु प्राप्ति ऊँची हो अर्थात मेहनत कम, सफलता हो अधिक

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : समय कम किन्तु प्राप्ति उॅची हो। लेकिन ऐसा नही होता है, हम देने के स्थान पर लेने में लगे रहते है। इसलिए चैक करे कि हर समय देने वाले है या कभी कभी देने वाले है या किन्ही किन्ही को देने वाले है या सभी को देने वाले है। कभी कहते […]Read More

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इन्तज़ाम करने वाले नही करेंगे इंतजार

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : इन्तजाम करने वाले अलर्ट और इन्तजार करने में लापरवाह रहते हैं. माया की चतुराई को इतंजार करने वाले लोग परख नहीं सके हैं। क्योकि इन्तज़ार की मीठी नींद में माया सुला रही है , सोने के संस्कार-वश हो कर कोई तो सेकेण्ड का झुटका खाते हैं और फिर होश में आते […]Read More

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चलें सूरज और केतु की ओर

@कृष्णा नारायण दिल्ली : 7 फरवरी 2021 को चमोली में हुआ त्रासदी हम सब को मर्माहत कर गया. पिछले वर्ष मैंने एक आलेख लिखा था सूर्य के विचलन पर, जिसे वैज्ञानिक सोलर मैक्सिमा और सोलर मिनिमा के नाम से जानते हैं. इन दोनों को समझने का विज्ञान का अपना तरीका है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसे […]Read More

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अपने आपको हर सेकण्ड बिजी रखना ही है परिवर्तन का मूल आधार

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : परिवर्तन का मूल आधार है अपने को हर सेकण्ड बिजी रखना। महारथी वह है जिसके अंदर सदा या संकल्प रहे कि जो भी समय है वह हमारे बिजनेस की सेवा के अर्थ ही देना है। चाहे अपने शरीर के लिये आवश्यक कार्य में भी समय लगाते हो तो भी स्वयं के […]Read More

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इमोशन्स की ब्लैक मार्केटिंग है वैलेंटाइन डे, इंसानों का किया जा रहा है इस्तेमाल तो चीजों से प्रेम

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : इमोशन्स की ब्लैक मार्केटिंग है, वैलेंटाइन डे। चीजें इस्तेमाल करने के लिए होती हैं और इंसान से प्रेम किया जाता है। परन्तु ग्लोबलाइजेशन के दौर में और भौतिकवादी संस्कृति के दबाव में इंसानों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चीजों से प्रेम किया जा रहा है। वैलेंटाइन डे विदेशी संस्कृति […]Read More

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लेखिका शिवानी खन्ना की एक लघु कथा “विराम चिह्न”

“मम्मी, क्या अब मेरी हाइट नहीं बढ़ेगी ? मैं स्केटिंग नहीं कर सकती ? ” 12 वर्षीय तूलिका ने मासूमियत से पूछा । ” किसने कहा ? ” तूलिका का हाथ पकड़, अँजू ने उसे गोद में बैठा लिया । ” रिंकु बता रही थी की उसकी दादी कहती है -अब बिना नहाए किचन में […]Read More

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लेखिका शिवानी खन्ना की एक लघु कथा “आत्मसमर्पण”

“बाहर छज्जे पर क्यों खड़ी हो ? “ “छत पर इतनी देर से क्या कर रही हो ?” “तुम उसे अकेले क्यों भेजती हो … आजकल अजनबी क्या अपनों पर विश्वास नहीं कर सकते ।” एक दिन “सनो बड़की दीदी का फ़ोन था कह रही थी उन्हें गुड्डो पसंद है “ “अब आगे क्या करना […]Read More

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अनुभव के बिना ज्ञान मात्र जानकारी

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : ज्ञान का अनुभव हो जाना ही सम्पूर्णता की निशानी है। अनुभव के पूर्व ज्ञान केवल जानकारी है। यह स्थिति आने में कभी शहर, कभी मुश्किल, कभी सैकेंड में, कभी मिनट में या कभी बहुत ज्यादा समय लगता है। सहज अनुभव होना सम्पूर्णता की परख है। कार्य के लगन में मगन रहना, […]Read More

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संगत का असर : पारस के संग लोहा भी बन जाता है पारस

मनोज श्रीवास्तव देहरादून : दूसरों से अलग रहने के लिए अपनी वैल्यू को बढाना होगा और वैल्यूएबल बनना होगा। वैल्यूएबल चीज रत्न के समान होती है जिसे शोकेस में रखा जाता है। यह सारी दुनिया के बीच में चमकता हुआ सितारा होता है। ऐसा ही अपने श्रेष्ठ भाग्य को याद करके खुशी में रहना है। […]Read More

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समय रहते नहीं चेते तो ये तूफान फिर लौटेगा

दिल्ली : विगत कुछ महीनों में ही दिल्ली और आस पास के इलाकों में भूकंप के हलके ही सही लेकिन चार पांच झटके आ चुके हैं. मई माह में तूफान अम्फन तथा जून के पहले हफ्ते में तूफान निसर्ग आया. अम्फन तूफान से ओडिशा और कलकत्ता में भीषण क्षति हुई. और अब ये उत्तराखंड में […]Read More

सम्पादकीय

जीवन की मुख्य शक्तियां हैं – तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति

भाग्य को साथ रखना अर्थात भाग्य विधाता को साथ रखना देहरादून : हरेक व्यक्ति के पास तन,मन को श्रेष्ठ बनाने अधिकार जन्म से ही प्राप्त होता है। ईश्वर जन्म से ही हमे सर्व शक्तियों के लिये जन्म-सिद्ध अधिकार का अधिकारी बना देता है। महत्वपूर्ण यह है सभी व्यक्ति को एक द्वारा एक जैसा ही अधिकार […]Read More

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क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन देने में ही बन जाते है बडे होशियर वकील और जज

देहरादून : लक्ष्य भी श्रेष्ठ है और कदम भी तीव्र गति के समान है। लेकिन, अभी जो यह रूप दिखाई देता है कुछ समय बाद इस रूप पर नजर लग जाने के कारण रूपरंग बदल जाता है। कदमों की तीव्र गति यथार्थ मार्ग की बजाये व्यर्थ मार्ग पर तीव्र गति से चलने लगते हैं। ईश्वरी […]Read More

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जो स्वयं को धोखा देने वाले होते है वह देते है सभी को धोखा

देहरादून : जो स्वयं को धोखा देने वाले होते है वह देते है सभी को धोखा. अपने प्रगति के आदि से अन्त तक का रजिस्टर चेक करना है कि हमने हर सब्जेक्ट में कितने मार्क लिये है। जैसे लक्ष्य स्पष्ट होता है वैसे ही लक्षण भी स्पष्ट दिखाई देने लगते है। निष्पक्ष रूप में जब […]Read More

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जिस रास्ते वे चले, उसी रास्ते पर हम क्यों चलें

“महाजनो येन गतः स पन्था” दिल्ली : जिस रास्ते पर महापुरुष, बड़े लोग, समझदार लोग चले हैं मनुष्यों को उसी रास्ते पर चलना चाहिए- दादा जी ने शिवि को समझाते हुए कहा| लेकिन क्यों बाबा? हम क्यों किसी और के चले रास्ते पर चलें? ऐसा इसलिए बेटा कि वे लोग जिन मार्गों से होकर गुजरे […]Read More

सम्पादकीय

दृढ़संकल्प करना अर्थात असम्भव को सम्भव के रूप मे देखना

देहरादून : जिसे दुनिया असम्भव मानती है, उसे सम्भव करके दिखाना है। इसके लिये परिवर्तन के दृढ़संकल्प का व्रत लेना है। व्रत करना अर्थात वृत्ति में परिवर्तन करना। दृढ़ संकल्प हमारे जीवन का फाउण्डेशन है। जिसे महात्मा लोग कठिन समझते हैं, असम्भव समझते हैं, उसे दृढ़ संकल्प की पवित्रता द्वारा सम्भव कर सकते हैं और […]Read More

सम्पादकीय

दिमाग नेगेटिव थॉट जबकि दिल है पॉजिटिव थॉट

देहरादून : दिमाग का स्पीड अधिक होती है लेकिन दिल स्पीड कम होती है,जो दिमाग के लिये ब्रेक कार्य करता है । क्योकि दिमाग मे विश्लेषण की क्षमता होती है,दिमाग चॉजो को तोड़ तोड़ कर देखता है। दिमाग के तोड़ने वाले चरित्र के कारण,दिमाग का सम्बन्ध नेगेटिविटी से रहता है। दिमाग की दूसरी विशेषता है […]Read More

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“अब चला लो वंश” एक प्रेरणादायक लघु कथा

शादी वाला घर था। इधर उधर की बातों में अब अगली शादी किसके घर होगी का ज़िक्र चल पड़ा । “ बस अब गौतमी के बेटे वंश की शादी रह गयी है ।”बड़ी बुआ ने कहा । “ अरे कुंतो जीजी आहिस्ता बोलो तुम्हें नहीं पता गौतमी का बेटा ‘ गे’ (समलैंगिक )है । “ […]Read More

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निर्भयता ही है शक्तिपन का अनुभव होने का अर्थ

देहरादून : शक्तिपन का अनुभव होने का अर्थ है, निर्भयता। निर्भय व्यक्ति माया के वार से बच जाता है। जो डरता है, वह हार खाता है। लेकिन जो निर्भय होता है, उससे माया खुद भयभीत रहती है। क्योंकि भय के कारण माया शक्ति और समझ खो देती है। इसी प्रकार जब हम भयभीत रहते हैं, […]Read More

सम्पादकीय

स्वयं को चेक करना ही है महान बनना अर्थात अपने महत्व को जानना

देहरादून : अपनी कमजोरी को छोड़ने के लिये महायज्ञ करना है, लेकिन यज्ञ में आहुति डालकर आहुति को वापस नहीं लेना है। जो प्रतिज्ञा करते हैं, इसको निभाते भी रहना है। हम प्रतिज्ञा तो करते हैं, लेकिन निभाना मुश्किल लगता है। इस सन्दर्भ में तीन प्रकार के लोग मिलते हैं। पहले प्रकार के लोग एक […]Read More

सम्पादकीय

बड़े-बड़े दांव लगा कर, सिद्धियों का जुआं खेल रहे हैं लोग

देहरादून : धर्म सत्ता में जल्दी अहंकार दिख जाता है। इसलिये इनकी स्वाभिमान गायब मिलती है। नाम है धर्म, लेकिन कर्म है, अतिकुकर्म। कुकर्म अर्थात विकर्म का कीड़ा, उन्हों की धर्म सत्ता अर्थात शक्ति को खत्म कर रही है। आज अनेक प्रकार के उल्टे नशों में चूर, धर्म के होश से बेहोश हैं, अर्थात आज […]Read More

सम्पादकीय

मैं कौन हूँ ? एक पजल, पहेली जिसका हल हैं सेल्फ रिस्पेक्ट, स्वमान

self respect स्वमान ही हैं मैं कौन हूँ ? एक पजल, पहेली का हल देहरादून : मैं कौन हूँ ? इन्हीं तीन शब्दों में सम्पूर्ण विश्व का सम्पूर्ण ज्ञान समाया है। यह तीन शब्द ही हमारे खुशी के खजाने की, ज्ञान धन खजाने की और समय धन खजाने की चाबी है। स्वमान अर्थात सेल्फ रिस्पेक्ट […]Read More

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प्रसिद्ध वहीं होता है, जिसका संकल्प और बोल होता है सिद्ध

देहरादून : सिद्ध स्वरूप बनने का अर्थ है हमारा हर बोल और संकल्प सिद्ध हो। अर्थात सारे दिन में जो संकल्प चलता है और मुख से जो बोल निकलता है वह सिद्ध है। संकल्प है बीज, बीज जितना समर्थ होगा उतना अच्छा फल निकलेगा, तब कहेगे संकल्प सिद्ध स्वरूप है । जिसका संकल्प और बोल […]Read More

सम्पादकीय

श्रेष्ठ टीचर का सर्टिफिकेट है स्वयं से संतुष्ट रहना और दूसरों को संतुष्ट करना

देहरादून : श्रेष्ठ टीचर के पीछे देख कर चलने वाले, करने वाले, आगे बढने वालों की लाईन लगी होती है। श्रेष्ठ टीचर दूसरों को सही लाईन में चलाने की जिम्मेदारी लेता है। हम कहा सकते है कि टीचर सही लाईन पर चलाने के निमित्त होता है। यदि टीचर रूक जाता है तब सारी लाईन रूक […]Read More

सम्पादकीय

मुस्कराहट की फोटो : टेंशन वाले कार्यो को भी करें मुस्कुराकर

देहरादून : यदि कभी भी कोई भी अचानक हमारा फोटो निकाले तब और कोई फोटो नहीं आये बल्कि “मुस्कराहट का फोटो हो” चाहे हम कामकाज कर रहे हो, काम का बहुत टेन्शन भी हो लेकिन चेहरे पर हमेशा खुशी हो। फिर हमको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी। अगर हमारे पास रूहानी मुस्कान का चेहरा […]Read More

सम्पादकीय

स्वयं से झूठ बोलना हिंसा है, कहते है तेरा लेकिन करते है मेरा

देहरादून : झूठ दो प्रकार के होते है पहला दूसरो से झूठ बोलना और दूसरा है स्वयं से झूठ बोलना। स्वयं से झूठ बोलना आत्मप्रवंचना कहलाता है इसे दार्शनिक भाषा में ठंक थ्ंपजी, आत्मा की बुरी औरी पतीत अवस्था कहते हैं। ऐसे ही हम झूठ बोलते है कहते है तेरा लेकिन करते है मेरा। कहते […]Read More

सम्पादकीय

बुद्धि को बिजी रखने से व्यर्थ संकल्पों के कम्पलेंट से हो जाते हैं फ्री

देहरादून : कम्पलेंट समाप्त होने पर कम्पलीट बन जाते हैं। हम तीन स्तरों पर अपना शिकायत करते हैं। पहला स्वयं से शिकायत जैसे-मैं यह काम क्यों नहीं कर पाता हूं, दूसरा औरों से शिकायत लोग हमारी मदद क्यों नहीं करते हैं और तीसरी स्तर की शिकायत के अन्तर्गत हम परमात्मा की भी शिकायत करते हैं, […]Read More

सम्पादकीय

सभी सवालों के समाप्त होते ही, लक्ष्य पर लग जाता है निशाना

देहरादून : राजऋषि में राजा और ऋषि दोनो के गुण मिलते है। राजा भोग करने वाला और ऋषि त्याग करने वाला गुण रखता है। राजऋषि के पद में भोग और त्याग दोनो का संतुलन रहता है। अर्थात भोग में त्याग अथवा त्याग में भोग की संकल्पना अतिवाद का खण्डन करते हुए मध्यम मार्ग का समर्थन […]Read More

सम्पादकीय

साइंस की पॉवर से अधिक होती है साइलेन्स की पॉवर

देहरादून : साइंस की पॉवर का प्रयोग के अंतर्गत कारण से होकर फिर समाधान पर फोकस किया जाता है जबकि साइलेन्स की पॉवर के अंतर्गत बिना कारण जाने सीधे समाधान पर फोकस कर के समाधान प्राप्त कर लेते है। वास्तव में जीवन मे अनेक समस्या है जिसका कोई कारण ही नही पता चल पाता है […]Read More

सम्पादकीय

हमे यह पता होना चाहिए कि मुझे करना क्या है और क्यो करना है

देहरादून : कार्य की क्षमता बढाने के लिए हमारे लिए पाजिटिव थाट एनर्जी बूस्टर का कार्य करता है। जब मन और बुद्धि एक साथ कार्य करते है तब हम अपने कार्य पर अधिक अच्छी तरह फोकस कर पाते है। हमें अपने लक्ष्य का विजन पता होना चाहिए और साथ में इसके वैल्यू के बारे में […]Read More

सम्पादकीय

संतुष्टता ही है व्यक्ति की असली प्रोपर्टी और पर्सेनालिटी है प्रसन्नता

देहरादून : संतुष्ट व्यक्ति तीन तरह के होते हैं पहला जो सदैव संतुष्ट रहता है। दूसरा जो कभी संतुष्ट और कभी असंतुष्ट के संकल्पों के छाया में अन्दर आते जाते रहते हैं और फिर निकल आते हैं लेकिन फसते नही हैं। तीसरे व्यक्ति जो कभी संकल्प की असंतुष्टता, स्वयं की असंतुष्टता, कभी परिस्थितियों की असंतुष्टता […]Read More

सम्पादकीय

हिम्मत आपकी मदद शक्तियों की, चलते रहें, रुके नही

देहरादून : विपरीत परिस्थिति में सिर पर अनेक प्रकार के विघ्नों का बोझ होगा, ताज नही होगा। सदैव किसी न किसी प्रकार का बोझ उनके बुद्धि में अवश्य महसूस होगा। ऐसे व्यक्ति कर्जदार और मर्जदार होंगे। उनके मस्तक पर, मुख पर सदैव क्वेश्चन मार्क होगा। हर बात में क्यों, क्या और कैसे यह क्वेश्चन होगा। […]Read More

सम्पादकीय

दुनिया के खेल में हार-जीत का अंतर होता हैं महज एक सेकेंड

देहरादून : विषय का अत्यधिक विस्तार उस विषय के के जरूरी है। सार में स्थित रहकर हम शक्तिशाली बने रहते है। जबकि विस्तार में कमजोर हो जाते है। सार में स्थित रहने के लिए समेटने की शक्ति का प्रयोग करना होगा। अपने को हर परिस्थिति से पार करने वाले शक्तिशाली स्थिति में स्थित रहने का […]Read More

सम्पादकीय

रिश्तों में उलझी मुस्कुराती वसीयत

दिल्ली (अंजू खरबंदा) : सुरेश पाल जी को रात को अचानक हार्ट अटैक हुआ । छोटा भाई हरेश और पत्नी सुनयना रात के दो बजे उन्हें लेकर अस्पताल भागे । शहर के सबसे अच्छे अस्पताल में एडमिट करवाया जहाँ दुनिया भर की सुविधाएँ थी । फिर भी रात भर भाग दौड़ रही । पम्मी घर […]Read More

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स्वमान की सीट पर सैट होकर कर्म करने से हमें मिल जाता है महानता का वरदान

देहरादून : सैल्फ रिस्पेक्ट, स्वमान अर्थात स्व को मान देने वाले जब अपने स्वमान कि सीट पर सैट होकर कर्म करने से महान बन जाते है। इनका हर कदम, हर चरित्र, हर पार्ट और हर सम्बन्ध महान होता है। ऐसे लोग अपनी महानता को जानते हुए अपना हर कदम उठाते है। ऐसे व्यक्तियों की महानता […]Read More

सम्पादकीय

दृढ संकल्प का अर्थ है मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन करके ही छोडेगें

देहरादून : एक ही लगन में, एक ही संकल्प में बैठना अर्थात दृढ संकल्प कर लेना है। इसके लिए अपने लगन में अग्नि को महसूस करना होगा। अपने लगन में अग्नि को पैदा करने की युक्ति की तिली से अग्नि को जला कर रखना है। लगन के अग्नि की तीली है, दृढ संकल्प करना। दृढ […]Read More

सम्पादकीय

जाने आखिर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रेस दिवस

गढ़वाल (गौरव गोदियाल) : देश में राष्ट्रीय प्रेस दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। भारत देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है । वहीं इसकी शुरूआत तो आदि काल से ही हो गई थी। बता दें कि देवर्षि नारद को पत्रकारिता का मुख्य जनक माना जाता है, क्योंकि नारद […]Read More

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सेमन्या कण्वघाटी समाचार पत्र एवं liveskgnews की वर्षगांठ, प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए एक और वर्ष

मेरे प्रिय साथियों,                  आप सभी के प्यार एवं सहयोग से सेमन्या कण्वघाटी समाचार पत्र आज अपने 07 वर्ष पुरे कर 08 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है व www.liveskgnews.com वेब न्यूज़ पोर्टल के तीन वर्ष पूर्ण होने पर आज 04 वर्ष में प्रवेश कर चूका है. आज www.liveskgnews.com वेब न्यूज़ पोर्टल नये डिजाईन, […]Read More

सम्पादकीय

जो निगेटिव को बदल दे पॉजेटिव में वही कहलाता है सच्चा लीडर

देहरादून : स्व स्थिति , अगंद की स्थिति की सहायता से सच्चा लीडर निगेटिव को पॉजीटिव में बदल देता है। उन्नति की तरफ बढाने कि निशानी है विघ्न विनाशक बनने का अनुभव करना। अर्थात विघ्न देखकर अपनी स्टेज पर अंगद के समान स्थित रहना है। और घबराना नही है। अनेके प्रकार के तूफान हमारी बुद्धि […]Read More

सम्पादकीय

संयुक्त परिवार में रहकर ही दूर किया जा सकता है “मानसिक तनाव”

संयुक्त परिवार में रहकर मानसिक तनाव को दूर कर जीवन को बनाये खुशहाल पौड़ी गढ़वाल (डॉ. अंजना शर्मा): वर्तमान समय में युवाओं में तनाव (mental stress) की समस्या एक आम विषय बनकर रह गया है. आए दिन युवाओं द्वारा आत्महत्या एवं इसके प्रयास एक आम घटना है. ऐसी घटनाएं हमारे समाज में कोई नई नहीं […]Read More

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सहनशक्ति अर्थात अपने में शक्ति भरना और दूसरों को शक्ति देना है

सेवा का विशेष गुण है संतुष्टता देहरादून : सहन करना अर्थात अपने में शक्ति भरना और दूसरों को शक्ति देना है, सहन करने का अर्थ मरना नहीं है। क्योंकि कुछ लोग कहते हैं कि हम तो सहन करते करते मर जायेंगे। हमारा लक्ष्य मरना नहीं है ना ही किसी को मारना है, बल्कि शक्ति लेकर […]Read More

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बनना है श्रेष्ठ तो स्पीड और लक्ष्य का होना चाहिए पता

देहरादून : पुरूषार्थ बिल्कुल सीधा रखना है, इधर उधर भटकाने नही देना है और अपने पुरूषार्थ से सन्तुष्ट भी रहना है। हम चाहते तो है श्रेष्ठ करना परन्तु शक्तिहीन होने के कारण जो चाहते है उसे कर नही पाते है। संकल्प और कर्म को समान बनना है। अर्थात अब संकल्प और कर्म के बीच कोई […]Read More

सम्पादकीय

किसी कार्य को करने से पहले ही ना शब्द का नही करना चाहिए प्रयोग

देहरादून : निष्काम कर्म के अन्र्तगत निष्काम व्यवहार भी करना चाहिए। हर व्यक्ति की राय को रिगार्ड देना है। चाहे कोई छोटा हो या बडा हो लेकिन किसी के राय को ठुकराना अर्थात अपने आप को ठुकाराना होता है। पहले तो किसी व्यक्ति को जरूर रिगार्ड देना चाहिए, भले ही वह व्यक्ति हमें उपदेश देने […]Read More

सम्पादकीय

विशेषता का करते रहेंगे वर्णन तब वातावरण स्वतः हो जायेगा अच्छा

देहरादून : आर्गेनाईजेशन का महत्व व्यक्ति से है और व्यक्ति का महत्व आर्गेनाईजेशन से है। हम मोती के समान है लेकिन मोती की वैल्यू तभी है जब मोती माला मे होगी, माला से अलग होने पर मोती की वैल्यू कम हो जाती है, वास्तव में आर्गेनाईजेशन में होने के कारण ही उस मोती का अस्तित्व […]Read More

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श्रेष्ठ शान में रहने पर नही होगें परेशान

देहरादून : एवरेडी बन कर हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना है, जिसके लिए अपने कमजोरी को समाप्त करना होगा। जो एवरेडी होगा उनका प्रैक्टिकल स्वरूप एवरहैप्पी होगा। कोई परिस्थिति रूपी पेपर, हलचल, प्रकृतिक आपदा अथवा शारीरिक कर्मभोग रूपी पेपर आने पर फुल मार्क्स लेने के लिए तैयार रहना होगा। हमे समय […]Read More

सम्पादकीय

हीरो एक्टर हमेशा होता है एक्टिव, एक्यूरेट और अट्रैक्टिव

देहरादून : हीरो एक्टर ही मुख्य एक्टर होता है, साइड रोल करने वाले एक्टर नही कहलाते है। हमारा उददेश्य मुख्य एक्टर बनना है क्योकि सभी का अटेन्शन हीरो एक्टर की तरफ होता है। इसलिए हमें हर सेकेण्ड के एक्ट में मुख्य एक्टर समझना है। नामीग्रामी एक्टर के पास तीन विशेषताएं अनिवार्य रूप में होती है। […]Read More

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18 सितंबर नैनीताल क्लीन अप डे : क्या देश कुछ अनोखा देखेगा !

नैनीताल (हिमांशु जोशी): कोरोना संक्रमित होने के बाद एक कोरोना मरीज़ की डायरी मैं रोज़ लिख रहा था पर फिर भी मुझे अपने चारों ओर घटित होने वाली घटनाओं में शामिल न होने की कसक थी ही और एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना मुझसे छूट रही थी जो शायद पूरे भारतवर्ष के लिए एक उदाहरण […]Read More

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ट्रस्टीशिप का सिद्वान्त अनेक समस्याओ का देता है समाधान

देहरादून : ट्रस्टीशिप का सिद्वान्त अनेक समस्याओ का समाधान देता है। ट्रस्टीशिप में मै और मेरा पन का भाव समाप्त हो जाता है, इसके कारण हम अनेक जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है। गृहस्थीपन का भाव हमें जिम्मेदारी के बोझ से दबा देता है। गृहस्थी व प्रवृति की विस्मृति ही ट्रस्टीशिप है। गृहस्थी के विपरीत […]Read More

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सफलता का करना है अभी अनुभव तो समय की विशेषता को ध्यान रखते हुए करें अपनी शक्तियों को जागृत

देहरादून : वर्तमान समय की विशेषताओं को जानते हुए अपने में अपनी शक्तियो को जागृत करना होगा। इसके लिए वर्तमान समय की विशेषताओं को अपने भीतर देखने का प्रयास होना चाहिए चेक करे कि यह विशेषतांए समय में ज्यादा है कि स्वयं में कम है। स्वयं में यदि अन्तर है तो कितना अन्तर है। चेक […]Read More

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सभी इफेक्ट से दूर रह कर बन जाते है परफेक्ट, हमारा प्रयास होना चाहिए कि हमारे भीतर न रहे कोई

देहरादून : इफेक्ट से बचने के लिए परफेक्ट बनना होगा। हमारा लक्ष्य परफेक्ट बनने का है, परफेक्ट अर्थात कोई डिफेक्ट न हो। यदि कोई भी डिफेक्ट हो, चाहे संकल्प का डिफेक्ट हो या सम्बन्ध, सम्पर्क का डिफेक्ट हो, यह उसी प्रकार होता है जैसे शरीर को मौसम का इफेक्ट पड जाता है और बीमारी अर्थात […]Read More

सम्पादकीय

सेवा हमारी खुशी का है आधार

दुःख अकेले नही बल्कि वंशावली के साथ आता है देहरादून : पवित्रता, हमारे सुख ,शांति और खुशी का आधार है। पवित्र रहने दृढ़ संकल्प कर्म स्तर पर ही नही बल्कि मन और वचन के स्तर पर भी पवित्रता जरूरी है। हमारा वास्तविक स्वरूप पवित्रता का है,लेकिन संग दोष के कारण अपवित्र बन जाते है। जहाँ […]Read More

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पॉजिटिव एटीट्यूड ही बनाता है आपको लीडर

देहरादून : बिगडी बात को कैसे ठीक किया जाय, जटिल परिस्थिति को कैसे सरल किया जाय या हमारे पॉजिटिव एटीटयूड पर निर्भर करता है। पाजिटिव एटीटयूड का अर्थ किसी भी परिस्थिति में शान्त रहना है और कम से कम प्रतिक्रिया देनी है। कहा जाता है, मौन सभी समस्यों का समाधान है। नजर नही नजरिया बदलने […]Read More

सम्पादकीय

कर्म और योग में बैलेंस रखने के लिए जरूरत होती है प्रैक्टिस की

देहरादून : कर्म योग का अर्थ सभी बातों में बैलेंस रहना है। कर्म करते हुए योग को नही भूलना और योग करते हुए कर्म को नही भूलना ही कर्मयोग है। कर्म का त्याग नही करना है, बल्कि कर्म में त्याग करना है। योग का त्याग नही करना है बल्कि योग करते हुए कर्म करना है। […]Read More

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कर्म भूमि पर जाने से पूर्व अपनी शक्तियों की कर ले जाँच

देहरादून : जिस प्रकार योद्वा, युद्व भूमि पर जाने के पूर्व अपने शस्त्र और सामाग्री की जाॅच करने के बाद मैदान में जाता है, उसी प्रकार हम भी अपने कर्म भूमि के मैदान पर जाने के पूर्व अपनी शाक्तियो की जाॅच कर लें। हमें कर्म भूमि पर कर्मयोद्वा बनकर परिस्थितियों से युद्व करना है। कर्म […]Read More

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दृढ़ संकल्प है परिवर्तन का आधार

देहरादून : दृढ़ संकल्प परिवर्तन का आधार है। वर्तमान समय भले ही हमारे भीतर कोई कमी ,कमजोरी हो लेकिन भविष्य में हम क्या बनेगे यह हमारे दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। हम मात्र एक दृढ़ संकल्प से अपने जीवन को बदल सकते है। मैं आत्मा हूँ, शरीर नही, इस धारणा का दृढ़ संकल्प न […]Read More

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सत्यता हैं सबसे बड़ी शक्ति व अथॉरिटी

सत्यता की अथॉरिटी : सत्यता कभी हिलती नहीं बल्कि अचल होती है। देहरादून : सबसे बड़े से बड़ी शक्ति वा अथॉरिटी सत्यता की है। सामान्य रूप से, सत दो अर्थ से कहा जाता है , एक सत अर्थात सत्य और दूसरा सत अर्थात अविनाशी। दोनों ही अर्थ से सत्यता की शक्ति सबसे बड़ी है। सत्य […]Read More

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कर्म युद्ध की भूमि पर किले का मजबूत रहना जरूरी

देहरादून : कर्म युद्ध के भूमि पर किले का मजबूत रहना जरूरी है। मजबूत स्थूल किला पर दुश्मन का वार नहीं हो सकता है। इसी प्रकार सूक्ष्म किला भी इतना मजबूत होना चाहिए कि कोई भी विकार हमारे भीतर प्रवेश न कर सके। किले की मजबूती ही हमारे संगठन का आधार है। यदि दिवार की […]Read More

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व्यक्ति का हमेशा लक्ष्य हो एक हो, अगर लक्ष्य बदलता रहेगा तो कैसे रहेगी एकाग्रता

देहरादून : हमेशा लक्ष्य एक हो। अगर लक्ष्य बदलता रहेगा तो एकाग्रता कैसे रहेगी ? इससे विचारों की श्रंखला टूट जाएगी। अगर किसी का आज गुण और स्वभाव एक होता है, कल दूसरा होता है तो मन से स्थिर नही हो सकता है । ऐसे लोग अंतिम लक्ष्य निर्धारित नही कर सकते है। लक्षण आते […]Read More

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दृढ़ निश्चयबुद्धि वाला व्यक्ति सदैव बढ़ता रहता है आगे

देहरादून : दृढ़ता, निश्चय बुद्धि का अनुभव कराता है। दृढ़ता सदा निश्चय अटल बनाता है और कभी डगमग भी होने देता । निश्चय बुद्धि की निशानी है – हर कार्य में, चाहे व्यावहारिक हो, चाहे पारमार्थिक हो, लेकिन हर कार्य में विजय का अनुभव होगा। कैसा भी असाधारण कर्म हो, लेकिन विजय का अधिकार उसको […]Read More

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जब फेल होना ही है, तब क्यों पढ़े : कर्म से भाग्य बनता है, न कि भाग्य से भाग्य बनता

देहरादून : जब ड्रामा में सब कुछ फिक्स है तब हम क्यों पुरूषार्थ करें। कर्म से भाग्य बनता है, न कि भाग्य से भाग्य बनता है, इसलिए भाग्य बनाना है तब कर्म करना ही होगा। प्रायः लोग कहते कि जब भाग्य में लिखा होगा, तब हमें स्वतः ही सफलता मिल जायेगी, फिर कर्म करने से […]Read More

सम्पादकीय

लॉ ब्रेकर की जगह बनना है लॉ मेकर

देहरादून : लॉ ब्रेकर की जगह लॉ मेकर बनना है। लॉ मेकर होने के लिए लॉ फुल बनना होगा, लॉ फुल बनने के लिए लवफुल बनना होगा। जब लवफुल होंगे तभी लॉ फुल होंगे, लवफुल नहीं होंगे तब लॉ फुल भी नहीं होंगे। दोंनो में संतुलन होना जरूरी है। लेकिन एक पर फोकस करके दूसरे […]Read More

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चियरफुल और केयरफुल रहकर ही बन सकते है सक्सेसफुल

देहरादून : लोगो की शिकायत रहती है कि परिश्रम ,पराक्रम और पुरुषार्थ करने पर भी सफलता नही मिल पाई। इसके आगे कहते है कि लगता है कि मेरी किस्मत में यही लिखा था। अपने तरीके से हर प्रयास कर लिया था लेकिन ड्रामा में यही लिखा है। लेकिन मेहनती, पराक्रमी और पुरुषार्थी को यह सोचना […]Read More

सम्पादकीय

सत्यता के लिए आवश्यकता हैं सहनशक्ति की

देहरादून : आजकल लोग स्पष्ट कहते हैं कि सच्चे लोगों का चलना ही मुश्किल है, झूठ बोलना ही पड़ता है । बिना झूठ बोल कार्य हो ही नही सकता है। लेकिन कई बार, कई परिस्थितियों में, महान व्यक्ति भी मुख से तो नहीं बोलते है, लेकिन अंदर समझते है कि कहां-कहां हमे चतुराई से तो […]Read More

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त्याग और भाग्य का है अनिवार्य सम्बन्ध

देहरादून : त्याग और भाग्य का अनिवार्य सम्बन्ध है। यदि त्याग है तब भाग्य अवश्य है। त्याग से भाग्य बनाने वाला भी अपना हो जाता है। त्याग से भाग्य को खीचने वाली कलम हमारे हाथ में आ जाती है, अर्थात हम जितना चाहें अपना भाग्य बना सकते हैं। पुराने कमियों और कमजोरियों का त्याग न […]Read More

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सहन करने की शक्ति रखती है नेगेटिविटी से दूर

देहरादून : कोई हमारी प्रशंसा करें और हम मुस्कुराए, इसको सहनशीलता नहीं कह सकते है , लेकिन यदि कोई दुश्मन बनकर, क्रोधित होकर, अपशब्दों की वर्षा करें, ऐसे समय पर भी हम सदा मुस्कुराते रहै और संकल्प मात्र भी मुरझाने का चिन्ह चेहरे पर ना हो, इसको कहा जाता है वास्तविक सहनशीलता । दुश्मन व्यक्ति […]Read More

सम्पादकीय

समय हमको समीप लायेगा अथवा हम समय के समीप जायेंगे

देहरादून : परीक्षा का समय नजदीक आ रहा है इसलिए सम्पूर्ण तैयारी रखनी है। सम्पूर्ण तैयारी को प्रैक्टिकल रूप देने से सफलता बिल्कुल समीप और स्पष्ट अनुभव होगा। तैयारी के दौरान वर्तमान स्टेज और सम्पूर्ण स्टेज में स्पष्ट अन्तर ज्ञात रहना चाहिए। हम कितनी भी तैयारी कर चुके हैं, लेकिन चेक करें कि क्या इसके […]Read More

सम्पादकीय

निश्चय बुद्धि वाले व्यक्ति कब,क्यो के सवाल में नही हैं फंसतें

निरन्तर में अंतर न आना, निश्चय बुद्धि के चेकिंग के आधार है देहरादून : निश्चय बुद्धि का अर्थ है किसी कार्य सौ प्रतिशत निश्चय रखना। सौ प्रतिशत निश्चय वाला व्यक्ति स्वयं को विजयी मान कर निश्चिन्त रहता है। केवल कार्य मे निश्चय रखने को पूर्ण निश्चयबुद्धि नही कह सकते है। कार्य मे निश्चय बुद्धि के […]Read More