हाथरस परिवार के 5 सदस्य सुरक्षा के साथ लखनऊ कोर्ट रवाना

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यूपी सरकार की तरफ से अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार, हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार और एसपी हाथरस सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहेंगे.

लखनऊ: हाथरस केस में आज बड़ा दिन है. आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस केस की सुनवाई होने वाली है. हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर सरकार और यूपी पुलिस के बड़े अधिकारियों को तलब किया है. पीड़िता का परिवार हाथरस के लिए रवाना हो चुका है. परिवार के पांच लोग भारी सुरक्षा में लखनऊ जा रहे हैं.

 

इस घटना को लेकर हाईकोर्ट कितना संजीदा है वो गांधी जंयती से ठीक एक दिन पहले यानी एक अक्टूबर को दिए गए इस आदेश से समझिए. हाईकोर्ट ने अपने आदेश की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कही मशहूर पंक्तियों से की.

 

हाई कोर्ट ने कहा, ”“तुम्हें एक जंतर देता हूं. जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम तुम पर हावी होने लगे तो यह कसौटी आजमाओ. जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा? क्या उससे उसे कुछ लाभ पहुंचेगा? क्या उससे वह अपने जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा? यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज्य मिल सकेगा, जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त है? तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम समाप्त होता जा रहा है.”

कोर्ट ने कहा ,“हमें पता चला है कि रात में दो-ढाई बजे पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया. वो भी परिवारवालों की ग़ैर-मौजूदगी में. पीड़िता का परिवार हिंदू धर्म का पालन करते हैं, जिसके तहत सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता.”

 

हाईकोर्ट ने कोर्ट ने आयरिश कवि ऑस्कर वाइल्ड को भी कोट करते हुए लिखा, ”“मृत्यु बेहद ख़ूबसूरत होनी चाहिए. कोमल सी भूरी चादर में लिपटे हुए, सिर से ऊपर तक उठी घास के बीच शांति को सुनते हुई. कोई बीता हुआ कल नहीं, कोई आने वाला कल नहीं. समय को भूलकर, जिंदगी को भूलकर, शांति में ले जाने वाली.”

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