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राशिफल व पञ्चांग 23 फरवरी 2019

22-02-2019 18:10:13

 

"वन विभाग ने मनाया विश्व बाघ दिवस"

कालागढ़ /पौड़ी  | 29 जुलाई विश्व बाघ दिवस पूरे विश्व मे इस दिन को मनाया जा रहा है और 3000 में से जो 2200 बाघ भारत के पास है उन पर जगह जगह सेमिनार , बैठके और कार्यक्रम आयोजित हो रहे है । कालागढ़ वन विभाग भी बहुत धूमधाम से विश्व बाघ दिवस को मना रहा है और उप प्रभागीय वनाधिकारी व वन क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में पूरा महकमा आज  फिर वन और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति शपथ ग्रहण कर रहा है । जो बेहद खुशी की बात है । कालागढ़ उप प्रभागीय वनाधिकारी आर के तिवारी वन्य जीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते है जो लोगो कक प्रभावित भी करते है । परन्तु जहाँ अन्य राज्यों में बाघ संरक्षण के लिए मंथन जरूरी भी है वही उत्तराखंड सरकार को आज इस क्षेत्र कालागढ़ के संरक्षण के लिए गहन चिंतन और मंथन की आवश्यकता है । जहाँ देश मे महज 2200 बाघ ही बचे है और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे है वही लगभग 2200 की आबादी वाला यह बेहद खूबसूरत और संकुचित क्षेत्र भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है । परन्तु इसमे नकारात्मक चीज यह है कि जहाँ पिछले कई वर्षो में बाघो की संख्या बढ़ी है तो वही कालागढ़ की संख्या घटी है । जहाँ बाघो की सुरक्षा के लिए कालागढ़ के पास आल ट्रेनी वेहिकल और ड्रोन जैसे उपकरण लाये गए । वही प्रशासन का बुलडोजर समय समय पर कालागढ़ की छाती पर चलता रहा । नतीजा बाघ की संख्या में क्षेत्र में मामूली इजाफा तो हुआ परन्तु इंसानों को इस बस्ती को नेस्तनाबूद कर दिया गया ।
हुक्मरानों ने प्रशासन ने वन विभाग ने आखिर यह साबित कर दिया कि मानव की कीमत जानवर से बहुत कम है ।
यह बात हम सब जानते है कि पर्यावरण के लिए सबसे जरूरी और पारिस्थितिक तंत्र में सबसे ऊपर बैठा यह जीव बाघ इंसानों के जीवन के लिए सबसे अहम किरदार निभाता है परन्तु जब कालागढ़ क्षेत्र में इंसान ही नही होंगे तो इस वन और बाघ को वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया संरक्षित करके आखिर क्या करेगा ।
समय समय पर चलते इस बुलडोजर ने 25000 की इस जनसंख्या वाले क्षेत्र को 5000 से भी कम पर ला दिया है और रोज एक या दो परिवार पलायन कर रहे है ।
मानवता दिलो से इस कदर खत्म हो गयी कि वन विभाग ने धर्म का भी ख्याल ना करते हुए केंद्रीय कालोनी में बने दुर्गा भवन को भी अपने कब्जे में लेकर जेसीबी से चारो तरफ बड़े बड़े गड्ढे खुदवा दिए ।
कालागढ़ वर्कचार्ज कालोनी का दुर्गा भवन जहाँ हर वर्ष गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम से मनाई जाती है साथ ही दशहरा के समय प्रोजेक्टर से बड़े परदे पर रामायण का प्रसारण भी होता है । सितम्बर से लेकर अक्टूबर तक वर्कचार्ज कालोनी या यह मैदान जो आज दुर्भाग्य से वन विभाग के अधीन है, लाइटों की चकाचौंध और हजारो श्रद्धालुओं से भरा रहता है । जिसमे कालागढ़ के साथ साथ पास के गांव के लोग भी गणेश पूजा दुर्गा पूजा और रामायण का आनंद लेने आते है । परन्तु मानवता के साथ साथ धर्म भी इंसानों के दिल से उस दिन खत्म हो गया जब कालागढ़ में ध्वस्तीकरण के बाद यह मैदान वन विभाग को सौंप दिया गया । और वन विभाग ने इसके चारों तरह जेसीबी से बड़े बड़े गड्ढे खुदवाकर हाथियों के चारे के लिए पूरे मैदान मे घास लगा दी जो जल्द ही घने जंगल का रूप ले लेगी । साथ ही एक बोर्ड लगा दिया गया है कि यहाँ किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है अगर कोई अंदर आता है तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 वह दण्डनीय अपराध है और उस पर कार्यवाही हो सकती है ।
यह सब देखकर ब्रिटिश काल का अनुभव हुआ जैसे वन विभाग ईस्ट इंडिया कम्पनी है और कालागड़वासी वो गुलाम जो सब चुपचाप सह रहे है ।
दुर्गा भवन को कब्जे में लेना वन विभाग की कालागढ़ मिशन ताबूत में एक और बड़ी कील है ।इन सबके बाद भी चौकाने वाली बात यह है कि पिछले कई वर्षों से कालागढ़ में मानव व वन्यजीव संघर्ष का कोई मामला सामने नही आया है । यहाँ के नागरिक बाघो व अन्य वन्य जीवों से बेहद प्रेम करते है कालागढ़ के ये लोग जानवरो को अब भी बहुत सम्मान देते है जबकि वो खुद बेघर हो रहे है अब देखना बाकी है कि क्या सरकार इस तरफ कोई ध्यान देगी क्या राजनीतिक दलों , वन विभाग के अंदर मानवता जागेगी या यूं ही वन विभाग कालागढ़ को एक ताबूत में बंद करके हमेशा हमेशा के लिए जमीन में दफनाकर अपने मिशन ताबूत को पूरा करेगा ।

"वर्कचार्ज फील्ड में स्थित दुर्गा भवन हमारे अंडर आ गया है अभी दुर्गा पूजा में काफी समय अभी कुछ नही कहा जा सकता जो भी तय होगा उसी के अनुसार अगली कार्यवाही की जायेगी "-
"आर के भट्ट" "वनक्षेत्राधिकारी कालागढ़"