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देहरादून : कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में डर का माहौल पैदा कर दिया है. इस महामारी ने अमेरिका जैसे सुपर पावर देश की भी कमर तोड़ दी है. इस वायरस से लड़ने के लिए जो वैक्सिन अमेरिका को चाहिए, वह बड़े पैमाने पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तैयार होती है. बता दें, दुनिया के कई देशों से मांग आने के बाद सेलाकुई स्थित कंपनी के प्लांट में इनका प्रोडक्शन बढ़ा दिया गया है.

दरअसल, मलेरिया के इलाज में काम आने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और कोलोगिन फॉस्फेक्ट लेरियागो टैबलेट का असर कुछ हद तक कोरोना पर भी कारगर बताया जा रहा है. इन दवाओं का भारत की चुनिंदा कंपनियां ही बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं. लॉकडाउन के बाद देश की तमाम फैक्ट्री बंद हो गई थीं, लेकिन जैसे ही देश को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और कोलोगिन फॉस्फेक्ट लेरियागो टैबलेट की अधिक जरूरत महसूस हुई, वैसे ही दवाई बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन करने के लिए तुरंत आदेश दिए गए.

इनमें सेलाकुई की कंपनी इप्का भी शामिल है. इस कंपनी का सेलाकुई में एक प्लांट है. प्लांट में पहले इस दवा की दो करोड़ टेबलेट प्रति माह तैयार की जाती थी. स्थानीय प्लांट के हेड गोविंद बजाज ने बताया कि इस दवा का उत्पादन अब पांच करोड़ टेबलेट प्रति माह कर दिया गया है. यदि सरकार की ओर से कोई निर्देश आते हैं तो इसे और भी बढ़ाया जा सकता है.

बताया कि इस दवा के लिए कच्चा माल भी उन्हीं की कंपनी ग्वालियर में तैयार करवाती है. लिहाजा, इसके लिए कच्चे माल की भी आगामी छह से सात महीने तक कोई कमी नहीं होने वाली है. इसके साथ ही सिक्किम में कंपनी का दूसरा प्लांट मलेरिया की ही दूसरी दवा तैयार करता है. इस वक्त कंपनी में दिन और रात की शिफ्ट में लगभग 300 कर्मचारी काम कर रहे हैं.

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