खनन कारोबारी पहुँचा रहे है सरकार को लाखो का नुकसान

Publish 19-06-2019 19:26:21


खनन कारोबारी पहुँचा रहे है सरकार को लाखो का नुकसान

कोटद्वार (गौरव गोदियाल):  यों तो खनिजों का खनन देश की अहम जरूरत है। लेकिन कुछ दशकों से समूचे देश में अवैध खनन की बाढ़ आ गई है। यह कारोबार नेताओंए अफसरों और माफियाओं की मिलीभगत की वजह से एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है।भारत प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है। भारत में खनन का इतिहास करीब छह हजार साल पुराना है। देश की आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में खनिजों की महत्ता सामने आई और सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए इस ओर ध्यान दिया। 1956 में औद्योगिक नीति प्रस्ताव सामने आयाए जिसके तहत उद्योगों के लिए खनिजों की भारी जरूरत महसूस की गई। कोयला सबसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ था क्योंकि इस्पातए रेलवे और बिजली उत्पादन में इसकी भूमिका बड़ी थी। लोहाए खनिज तेलए प्राकृतिक गैस, सोना, चांदि, तांबा, जस्ता वगैरह खनिज पदार्थ सार्वजनिक क्षेत्र की खदानों से निकाले जाते थे।नई खनिज नीति 1993 के तहत खनिज क्षेत्र को निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोल दिया गया। भारत में कुल 89 खनिजों का उत्पादन होता है जिनमें 4 ईंधनए 11 धात्विकए 52 अधात्विक और 22 लघु खनिज हैं।
खनन हमारे औद्योगिक विकास से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार ने खनन में निजी भगीदारी का रास्ता खोला लेकिन निजी भागीदारी के नाम पर अवैध खनन देश का विकास नहीं विनाश कर रहा है। खनन में एक फीसद की बढ़ोतरी का मतलब होता है औद्योगिक उत्पादन में 1.2 से 1.4 फीसद की वृद्धि जिसका सीधा असर सकल घरेलू उत्पादन में 0.3 फीसद के इजाफे के तौर पर सामने आता है। इसलिए खान मंत्रालय सकल घरेलू उत्पाद में खनन के मौजूदा 2.3 फीसद हिस्से को बढ़ाकर 7.8 फीसद करना चाहता है लेकिन इसका रास्ता अवैध खनन से होकर नहीं जाना चाहिए। इसके लिए एक टिकाऊ और समग्र पारदर्शी नीति होनी चाहिए। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने माइंस एंड मिनरल्सए डेवलपमेंट ऐंड रेगुलेशन.विधेयक 2011 प्रस्तुत किया था ।भारत के 28 राज्यों में से कम से कम बीस राज्यों में खनिजों का खनन होता है। इसके लिए यहां की सरकारें खनन पट्टे आंवटित करती हैं। खनन पट्टों को आवंटित करने के अलावा खनन की प्रक्रिया भी सरकारी नियमों के अनुसार तय की जाती है। लेकिन खनन पट्टों के आवंटन को लेकर खनन के क्षेत्रए सीमा और स्थानीय प्रशासन को सूचित करने की औपचारिकता को माफिया अधिकारी और नेताओं का संयुक्त गिरोह सब कुछ ताक पर रखकर अपने हितों के लिए राष्ट्रीय संपत्ति की लूट को बेखौफ अंजाम देता आ रहा है।भ्रष्टाचार के मुद्दे देश की जनता का ध्यान ज्यादा खींचते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाने वालों को इस बात पर भी गंभीरता से सोचना चाहिए कि अकेला अवैध खनन भ्रष्टाचार का कितना बड़ा संयुक्त उपक्रम है और यह अकेले कितना काला धन पैदा कर रहा हैघ् यह तो नहीं हो सकता कि अवैध खनन चालू रहे और भ्रष्टाचार खत्म हो जाए ।खतरनाक बात यह है कि पहले खनन माफिया एक छोटे से इलाके में खनन की अनुमति लेता है और उसके बाद वह बड़े इलाके तक अतिक्रमण कर लेता है इसके लिए वह न तो कोई कर देता है और न ही उसकी कोई जिम्मेदारी ही होती है। यही सब कोटद्वार में देखने को मिल रहा है ।खनन कारोबारियों के काम का तरीका लगभग सब जगह एक समान है क्योंकि आमतौर पर खनन के ठेके ऊँची पहुँच वालो को ही दिए जाते हैंए जिस पर वे अनुमति के दायरे से बाहर जाकर काम करते हैं।

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