पुरातत्व विभाग ने थमाये भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस

Publish 25-04-2019 19:52:31


पुरातत्व विभाग ने थमाये भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस

गोपेश्वर (जगदीश पोखरियाल)। पुरातत्व विभाग ने चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर के आस-पास बने 120 भवनों के स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस थमा दिये हैं। जिससे अब ग्रामीणों में विभागीय कार्रवाई को लेकर खासा आक्रोश बना हुआ है। ग्रामीणों ने मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर मामले के निस्तारण की मांग उठाई है।
चमोली जिला मुख्यालय पर स्थित पौराणिक गोपीनाथ मंदिर को पुरातत्व विभाग ने वर्ष 1992 में अधिग्रहण किया गया था। लेकिन मंदिर के संरक्षण के नाम पर अधिग्रहण के कई सालों बाद अब विभाग ने ग्रामीणों को  अपनी नाप भूमि में बनाये गये भवनों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण के नोटिस दे दिये हैं। जिससे ग्रामीणों को अपने भवनों के ध्वस्त किये जाने की डर बना हुआ है। स्थानीय निवासी नवल भट्ट, विपिन भट्ट, चंडी प्रसाद का कहना है कि उनके अपने पैतृक आवासों का सुधारीकरण करवाया गया है। लेकिन विभाग इन निर्माणों को भी नवीन निर्माण की श्रेणी में रखते हुए ध्वस्तीकरण के नोटिस थमा दिये गये हैं। जबकि पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी स्मारक के अधिग्रहण के बाद क्षेत्र में नवीन निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों ने मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग उठाई है।

क्या है स्मारक संरक्षण अधिनियम 2010
भारत सरकार की ओर से पौराणिक स्माराकों के संरक्षण के लिये वर्ष 2010 में स्मारक संरक्षण अधिनियम तैयार किया गया। जिसके अनुसार पुरातत्व विभाग के संरक्षण वाले स्मारकों के 100 मीटर क्षेत्र में जहां नव निर्माण पूर्ण रुप से प्रतिबंधित हैं। वहीं 200 से 300 मीटर के मध्य निर्माण करने के लिये विभागीय अनुमति आवश्यक है।

क्या कहते है अधिकारी
स्मारक संरक्षण अधिनियम 2010 के तहत ग्रामीणों को नोटिस भेजे गये हैं। नोटिस के बाद भवनों के ध्वस्तीकरण अथवा अन्य कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार व जिला प्रशासन की है। विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई गई है।
रंजीत सिंह, सहायक, अधीक्षण पुरातत्व अभियंता, देहरादून।

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